भोपाल। मध्य प्रदेश में दीपावली के पावन त्यौहार से ठीक पहले प्रदेशभर के करीब एक लाख सफाई कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से समूचे राज्य में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। त्यौहार के ऐन वक्त पर काम ठप होने से शहरों के प्रमुख चौराहों, रिहायशी इलाकों की गलियों और मुख्य व्यापारिक बाजारों में जगह-जगह कचरे के अंबार देखने को मिल रहे हैं। घर-घर से कचरा उठाने की डोर-टू-डोर सेवा बाधित होने के कारण गंदगी का जमावड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसका सर्वाधिक प्रतिकूल असर प्रदेश की राजधानी भोपाल में देखने को मिल रहा है।
राजधानी में चरमराई कचरा संग्रहण व्यवस्था
भोपाल शहर में सफाई कर्मियों की कामबंदी लगातार दूसरे दिन भी जारी रही, जिसके चलते न्यू मार्केट जैसे व्यस्ततम व्यापारिक परिसरों में चारों तरफ गंदगी फैली नजर आई और स्थानीय व्यापारियों को स्वयं स्वयंसेवकों की सहायता से सफाई अभियान चलाना पड़ा। एक अनुमान के मुताबिक अकेले राजधानी में ही लगभग 10 हजार सफाईकर्मी इस आंदोलन में शामिल हैं। सामान्य दिनों में नगर निगम की 400 से अधिक गाड़ियां दैनिक आधार पर पूरे शहर से करीब 900 टन कचरा एकत्र कर 17 ट्रांसफर स्टेशनों के माध्यम से आदमपुर छावनी स्थित मुख्य डंपिंग यार्ड तक पहुँचाती हैं, लेकिन त्यौहार की साफ-सफाई के दिनों में कचरे की मात्रा बढ़ने के बावजूद कलेक्शन पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।
प्रशासनिक वार्ता बेनतीजा और हड़ताल जारी
समस्या के समाधान के लिए ऑल इंडिया सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के साथ उच्चस्तरीय बैठक की, परंतु किसी सकारात्मक नतीजे पर न पहुँच पाने के कारण यूनियन ने आंदोलन को अनिश्चितकाल के लिए जारी रखने की घोषणा की है। यूनियन नेतृत्व का दावा है कि इस हड़ताल के समर्थन में प्रदेश की 16 नगर निगमों और 374 नगर परिषदों के सभी कर्मचारी एकजुट होकर काम का बहिष्कार कर रहे हैं, जिससे पूरे राज्य में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है।
सफाई कर्मियों की प्रमुख मांगें
आंदोलनरत कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया है। उनकी मुख्य मांगों में नगर निगम के समस्त सफाई कर्मचारियों को नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना तथा सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके जीवनसाथी को अनुकंपा नियुक्ति देने का कानूनी प्रावधान शामिल है। इसके अलावा वे न्यूनतम वेतनमान 25 हजार रुपये तय करने, सफाई व्यवस्था में लागू ठेकेदारी प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करने और वर्षों से कार्यरत संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग पर अड़े हुए हैं।



