नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार को पश्चिम बंगाल के करीब 20 लाख से ज्यादा राज्य सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि 2008 से 2019 तक की अवधि का DA बकाया भुगतान किया जाना चाहिए. इसके साथ ही कहा कि, अपने पहले के अंतरिम आदेश के अनुसार, बकाया राशि का कम से कम 25% 6 मार्च तक जारी किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल और पीके मिश्रा की बेंच ने कहा कि ROPA के तहत परिलब्धियों की गणना के लिए DA जरूरी है. बंगाल सरकार ने DA के खिलाफ वित्तीय क्षमता का हवाला देते हुए याचिका दायर की थी, उस दलील को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
SC के आदेश पर कमेटी का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने DA भुगतान प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए शीर्ष अदालत की पूर्व जज इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता मे कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी में जस्टिस इंदु मलहोत्रा के साथ ही 2 जस्टिस और CAG के अधिकारी शामिल होंगे. कमेटी के सभी सदस्य मिलकर तय करेंगे कि किस तरह से बकाया DA का भुगतान किया जाएगा. इसकी रिपोर्ट 16 मई तक तैयार कर सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी. रिपोर्ट के बाद ही अगली सुनवाई की जाएगी।
12 साल का रुका डीए मिलेगा
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ‘मनमाना’ और ‘सनकी’ बताया है. जबकि कोर्ट ने माना कि नियमों में बदलाव से कर्मचारियों के अंदर वैद्य अपेक्षा पैदा हुई थी और राज्य सरकार ने बिना किसी ठोस सिद्धांतों के इसका उल्लंघन किया है. हालांकि कोर्ट ने भी यह माना है कि साल में 2 बार डीए नहीं दिया जा सकता है. वहीं महंगाई भत्ते को मौलिक अधिकार मानने वाले सवाल पर कोर्ट ने बाद के लिए छोड़ दिया है. फिलहाल, आज का दिन राज्य कर्मचारियों के लिए बेहद शानदार रहा है. क्योंकि 12 साल का रुका हुआ डीए अब 6 मार्च से पहले 25 प्रतिशत मिल जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष ने किया स्वागत
पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “यह बहुत लंबे समय से लंबित मुद्दा था, जिस पर आज निर्णय आ गया है. हम इसका स्वागत करते हैं. DA सही मांग है, इसके लिए हमने कर्मचारियों का समर्थन किया. 6 मार्च तक ममता बनर्जी की सरकार को 10,400 रुपए देने पड़ेंगे. DA की मांग सही है, यह आज सुप्रीम कोर्ट के आदेश से स्थापित हो गया है.अप्रैल के बाद यहां घुसपैठियों का सरंक्षण करने वाली सरकार नहीं रहेगी।


