मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने टाटा संस के आंतरिक प्रबंधन और नेतृत्व संरचना (लीडरशिप स्ट्रक्चर) में हाल ही में हुए बदलावों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश के सामाजिक ताने-बाने और आर्थिक विकास के दृष्टिकोण से टाटा समूह की परोपकारी पहचान, संस्थागत मूल्यों एवं विश्वास पर आधारित ओनरशिप मॉडल को अक्षुण्ण रखना अत्यंत आवश्यक है। शरद पवार ने जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित तथा सर दोराबजी टाटा व सर रतन टाटा द्वारा संवर्धित मूल भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस औद्योगिक घराने का मुख्य ध्येय व्यापार से अर्जित लाभ को समाज कल्याण के कार्यों में लगाना रहा है।
'महाराष्ट्र टाटा की गौरवशाली विरासत का केंद्र'
शरद पवार ने रेखांकित किया कि इस व्यवस्था के अंतर्गत टाटा संस का बहुतांश मालिकाना हक किसी व्यक्ति विशेष के पास न होकर चैरिटेबल ट्रस्टों को सौंपा गया था। वर्तमान में सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट जैसी प्रमुख संस्थाओं के पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी है। इस हिस्सेदारी से प्राप्त लाभांश (डिविडेंड) का उपयोग सीधे तौर पर लोक स्वास्थ्य, शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं ग्रामीण आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र इस गौरवशाली परंपरा का केंद्र रहा है, जहां टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) और नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स (NCPA) जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान स्थापित हैं।
टाटा संस बोर्ड बैठक और कानूनी विवाद
17 सितंबर को आयोजित टाटा संस की बोर्ड बैठक का संदर्भ देते हुए शरद पवार ने कार्यकारी अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार तथा कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग की दिशा में उठाए गए कदमों से जुड़े 4-1 के विवादित मतदान की ओर ध्यान आकर्षित किया। इस बैठक में टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष नोएल टाटा ने प्रस्तावों के विरोध में मतदान किया था, जबकि नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने पक्ष में वोट दिया।
शरद पवार के अनुसार, कंपनी के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के तहत शीर्ष नेतृत्व से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए मुख्य ट्रस्टों का प्रतिनिधित्व करने वाले दोनों नामित निदेशकों (नॉमिनी डायरेक्टर्स) की सहमति अनिवार्य है। अतः एक निदेशक के विरोध के कारण 4-1 से पारित यह प्रस्ताव कानूनी रूप से वैध नहीं ठहरता।
संस्थागत अधिकारों के सम्मान और संवाद की आवश्यकता
शरद पवार ने जोर देकर कहा कि कॉर्पोरेट निर्णयों में टाटा ट्रस्ट के नामित निदेशकों को प्राप्त विशेषाधिकार (वीटो पॉवर) और सहमति संबंधी अधिकारों का पूर्ण सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेतृत्व संबंधी मतभेदों को टकराव के बजाय रचनात्मक संवाद और विधिक कॉर्पोरेट प्रक्रियाओं के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय पूर्व में ट्रस्ट के नामांकित सदस्यों के विशेष स्वीकृति अधिकारों को मान्यता प्रदान कर चुका है।
राष्ट्रीय विकास हेतु सामूहिक उत्तरदायित्व
अपनी बात को विराम देते हुए शरद पवार ने कहा कि कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उच्च मानकों का पालन, आंतरिक नियमावली का आदर तथा ट्रस्ट-आधारित स्वामित्व संरचना को बनाए रखना जन-विश्वास बनाए रखने हेतु अपरिहार्य है। उन्होंने सभी हितधारकों से इस ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की अपील करते हुए कहा कि देश के समग्र विकास के प्रति समर्पित इस समूह की साख की रक्षा करना सभी का सामूहिक दायित्व है।


