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    स्थापना दिवस पर शिंदे का उद्धव ठाकरे पर बड़ा हमला, दी सख्त चेतावनी

    मुंबई। महाराष्ट्र के राजनैतिक गलियारे में एक बार फिर तीखे बयानों और जुबानी तीरों का दौर चरम पर पहुंच गया है। शिवसेना के स्थापना दिवस के भव्य समारोह के मंच से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे और उनके धड़े (यूबीटी) पर तीखा और सीधा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि उद्धव खेमे में मची भगदड़ और बिखराव की प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है, बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति में और भी बड़े फेरबदल व चौंकाने वाले घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। शिंदे के इस आक्रामक तेवर से राजनैतिक गलियारों में यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि यदि उनके दावों में सच्चाई है, तो उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली बची-खुची पार्टी में एक बार फिर बड़ी बगावत देखने को मिल सकती है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए ठाकरे के नेतृत्व क्षमता को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यदि कोई शीर्ष नेता अपने ही करीबियों और विश्वस्तों को संभालकर साथ रखने में अक्षम साबित हो रहा है, तो उसे दूसरों पर लांछन लगाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। सीएम ने यह भी दावा किया कि वर्तमान महायुति सरकार पूरी तरह अडिग है और विपक्ष के कई बड़े चेहरे लगातार उनके संपर्क में बने हुए हैं।

    कुत्ते झुंड में भौंकते हैं और शेर अकेला आता है वाले बयान पर मचा सियासी बवाल

    स्थापना दिवस के मंच से विरोधियों को ललकारते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, “अभी जो कुछ भी राजनीतिक उथल-पुथल हुई है, वह तो महज एक ट्रेलर है, पूरी की पूरी असली फिल्म का आना तो अभी बाकी है। आज आपके समक्ष जो खड़ा है, वह एक शेर है। कुछ लोग कुत्तों की भांति लगातार भौंकने का काम कर रहे हैं, जो कल और परसों भी इसी तरह जारी रहेगा। मैं आप सभी को एक बात पूरी तरह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि कुत्ते हमेशा झुंड बनाकर ही भौंकते हैं, जबकि शेर हमेशा अकेला ही मैदान में आता है। जब शेर शिकार पर निकलता है या अपनी दहाड़ मारता है, तब भी पीछे से कुत्ते केवल भौंक ही सकते हैं। यही असली और जीवंत शिवसेना है, जो आज पूरे महाराष्ट्र के भीतर पूरी मजबूती और स्वाभिमान के साथ सीना ताने खड़ी दिखाई दे रही है।” दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे खेमे ने मुख्यमंत्री के इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे केवल मानसिक और राजनैतिक दबाव बनाने का एक खोखला प्रयास करार दिया है, जिसके चलते पार्टी आलाकमान अपने बचे हुए सांसदों और विधायकों को एकजुट रखने के लिए लगातार आंतरिक मैराथन बैठकें आयोजित कर रहा है।

    कांग्रेस ने कभी मातोश्री को लालच से नहीं देखा और शब्द का सम्मान किया

    दूसरी तरफ, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी अपने विरोधियों पर कड़ा पलटवार करते हुए दल के मूल सिद्धांतों को रेखांकित किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि शिवसेना किसी अन्य दल में विलीन होने या घुटने टेकने के लिए पैदा नहीं हुई है, बल्कि इसका निर्माण ही मराठी मानुष के अधिकारों की रक्षा और उनके सतत संघर्ष के लिए किया गया था। अपने राजनैतिक सफर का जिक्र करते हुए ठाकरे ने स्वीकार किया, “मैं इस बात से कतई इनकार नहीं करूंगा कि कांग्रेस ने पूर्व में हमें कभी राजनीतिक रूप से परेशान नहीं किया। हमारी राजनीति का एक बहुत बड़ा हिस्सा कांग्रेस की विचारधारा के विरोध में ही बीता है, क्योंकि उस दौर में हम भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में थे और वंदनीय बालासाहेब ठाकरे पूरी ताकत से उनके समर्थन में खड़े रहते थे।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने भले ही पूर्व में हमारे कुछ नेताओं को अपने पाले में किया हो, परंतु उन्हें कभी शीर्ष पद (मुख्यमंत्री) की कुर्सी तक नहीं पहुंचाया, लेकिन इन सबके बावजूद कांग्रेस ने कभी भी 'मातोश्री' की तरफ लालच भरी नजरों से नहीं देखा और कम से कम अपने दिए हुए वचनों का सम्मान करना बखूबी जानती थी।

    यदि आरोप सत्य साबित हुए तो तत्काल छोड़ दूंगा शिवसेना प्रमुख का पद

    अपने संबोधन के अंतिम चरण में उद्धव ठाकरे ने खुद पर लग रहे आरोपों को लेकर जनता की अदालत में अपनी बात रखी। उन्होंने अत्यंत आक्रामक और गंभीर मुद्रा में कहा, “मेरे राजनीतिक चरित्र और निर्णयों पर विरोधियों द्वारा जो भी लांछन या गद्दारी के आरोप मढ़े जा रहे हैं, यदि सूबे की जनता को लगता है कि उन आरोपों में रत्ती भर भी सत्यता है, तो वे खुलकर कहें। मैं आज ही पूरी गरिमा के साथ शिवसेना पक्ष प्रमुख का यह सर्वोच्च पद छोड़ने के लिए सहर्ष तैयार हूं।” उन्होंने भाजपा और शिंदे गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लोकतंत्र की मूल आत्मा को ठेस पहुंचा रहे हैं, परंतु वे किसी भी सूरत में अपनी विरासत को धोखेबाजों के हवाले नहीं करेंगे। दोनों ही पक्षों के इन बेहद आक्रामक और तीखे बयानों से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की धरती पर यह सियासी जंग और अधिक उग्र रूप धारण करने वाली है।

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