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    ‘सर जडेजा’ को मिला ‘मोस्ट वैल्यूड प्लेयर’ का खिताब, गंभीर-डेशकाटे ने जमकर की तारीफ

    नई दिल्ली : भारत और इंग्लैंड के बीच जारी पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के तीसरे मुकाबले में स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने लगभग छह घंटे बल्लेबाजी की, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। इंग्लैंड ने लॉर्ड्स टेस्ट में भारत को 22 रनों से हराया और सीरीज में 1-2 से बढ़त हासिल कर ली। जडेजा के दमदार प्रदर्शन की अब मुख्य कोच गौतम गंभीर, सहायक कोच रेयान डेशकाटे और बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने तारीफ की है।

    'मोस्ट वैल्यूड प्लेयर' बने जडेजा

    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार को भारतीय ड्रेसिंग रूम का एक खास वीडियो साझा किया, जिसमें भारतीय दिग्गजों को जडेजा की प्रशंसा करते देखा जा सकता है। इसी के साथ जडेजा को मोस्ट वैल्यूड प्लेयर (एमवीपी) का तमगा भी मिला। गंभीर ने कहा, 'यह एक अविश्वसनीय मुकाबला था। जड्डू का प्रदर्शन शानदार था।'

    डेशकाटे ने भी की जडेजा की तारीफ

    193 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 36 वर्षीय ऑलराउंडर जडेजा ने भारत की दूसरी पारी में 181 गेंदों का सामना किया और 61 रन बनाकर नाबाद रहे। नंबर सात पर बल्लेबाजी करने उतरे जडेजा को बुमराह और सिराज का साथ मिला, लेकिन वह भारत को जीत नहीं दिला सके। तीनों ने 34 से ज़्यादा ओवर तक संघर्ष किया और इंग्लैंड के गेंदबाजों को निराश किया। डेशकाटे ने कहा, 'उनकी बल्लेबाजी एक अलग ही स्तर पर पहुंच गई है। पिछले दो टेस्ट मैचों में, उन्होंने ड्रेसिंग रूम में जो निरंतरता और शांति दिखाई है… मैं उन्हें इतने वर्षों से देख रहा हूं, और जिस तरह से उन्होंने अपने खेल को निखारा है। उनका डिफेंस बहुत मजबूत है, वे एक बेहतरीन बल्लेबाज लगते हैं।'

    चौथी पारी में सर्वाधिक गेंदें खेलने वाले दूसरे भारतीय

    जडेजा लॉर्ड्स में चौथी पारी में सबसे गेंदें खेलने वाले दूसरे भारतीय बन गए। इस मामले में उन्होंने पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को पीछे छोड़ दिया। धोनी ने साल 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ इस मैदान पर चौथी पारी में 159 गेंदें खेली थीं। इस मामले में शीर्ष पर अजीत अगरकर हैं, जिन्होंने 2002 में 190 गेंदें खेली थीं। भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने कहा, 'मुझे हमेशा लगता था कि उनमें दबाव झेलने की क्षमता है। इतने अनुभव के साथ,वह आमतौर पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में टीम की जरूरत के अनुसार प्रदर्शन करते हैं। वह टीम के लिए वाकई बहुत मूल्यवान हैं।'

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