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    Homeधर्म-समाजइन 5 लोगों को कभी नहीं काटता सांप, सर्पदंश भय से भी...

    इन 5 लोगों को कभी नहीं काटता सांप, सर्पदंश भय से भी हमेशा रहते हैं मुक्त

    सांप का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर समा जाता है. जहर से भरे फन वाले इस जीव से हर कोई बचना चाहता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ खास तरह के लोगों को सांप कभी नुकसान नहीं पहुंचाते? विभिन्न धार्मिक, तांत्रिक और ज्योतिषीय परंपराओं में कुछ विशेष व्यक्तियों को सांप (नाग) नहीं काटते या उनका विष उन पर प्रभाव नहीं डालता. साथ ही ये व्यक्ति हमेशा सर्पदंश भय से भी मुक्त रहते हैं. तो कौन हैं ये लोग जिनसे सांप भी डरते हैं और क्यों उनके आस-पास जाते ही ये विषधर शांत हो जाते हैं?
    ऐसे लोगों की शिवजी करते हैं रक्षा
    शिवजी को नागों का स्वामी कहा जाता है और उनके गले में वासुकि नाग का वास होता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति भक्ति भाव से शिवजी की पूजा करता है और शिव तांडव स्त्रोत या महामृत्युंजय मंत्र जप करता है. साथ ही प्रदोष तिथि या शिवरात्रि के मौके पर रुद्राभिषेक करता है तो उनको सांप कभी नहीं काटते. कहते हैं, जिस पर भोलेनाथ की कृपा हो, उसकी नाग भी रक्षा करते हैं. महामृत्युंजय मंत्र का प्रभाव नागदोष और विष से रक्षा करता है.

    कुंडली में ग्रहों की विशेष स्थिति
    ज्योतिषाचार्य के अनुसार, कुछ लोगों की कुंडली में विशेष ग्रह स्थिति होती है, जिसे कालसर्प दोष कहते हैं. माना जाता है कि जिनकी कुंडली में यह दोष नहीं होता, उन्हें सर्पदंश का भय भी नहीं होता है. हालांकि यह पूरी तरह धार्मिक विश्वास पर आधारित है. जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी 7 मुख्य ग्रह—सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि—राहु और केतु के बीच में आ जाएं, तो उस योग को कालसर्प दोष कहा जाता है.

    नाग पंचमी पर पूजा अर्चना करने वाले
    नाग पंचमी पर जो लोग नाग देवता की पूजा, दूध अर्पण और व्रत करते हैं, उनको सर्पदंश का भय नहीं रहता. मान्यता है कि नाग पंचमी की पूजा करने वालों को नाग देवता का आशीर्वाद मिलता है और सांप जीवनभर उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाते. वहीं गरुड़ पुराण व अन्य ग्रंथों में कहा गया है कि जो व्यक्ति पूर्व जन्म में नागों की सेवा, पूजा या रक्षा करता है उसे इस जन्म में नाग नहीं काटते.
    गोरखनाथजी की सेवा करने वाले
    गोरखनाथजी और सांप का संबंध अत्यंत रहस्यमयी, आध्यात्मिक और योगिक शक्ति से जुड़ा हुआ है. नाथ संप्रदाय की परंपराओं और लोककथाओं में गोरखनाथ जी को नागों के स्वामी, वशकर्ता और रक्षक के रूप में माना जाता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति गोरखनाथजी की पूजा अर्चना करता है या फिर सांप दिखने पर गोरखनाथजी का नाम लेता है, तो उसको कभी भी सांप नहीं काटता. साथ ही वह हमेशा सर्पदंश से भय मुक्त रहते हैं.

    राहु और केतु शांत हैं तो शुभ
    ज्योतिष शास्त्र अनुसार, राहु और केतु नागों से संबंधित छाया ग्रह हैं. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु शुभ स्थिति में हों या उनकी शांति कर दी गई हो, तो सर्प दोष नहीं होता है और सांप जैसे जीव निकट भी नहीं आते. साथ ही माना गया है कि सर्प कभी बिना कारण नहीं काटता. जो व्यक्ति हिंसा नहीं करता, गौ-सेवा करता है, उनके शरीर की गंध और ऊर्जा सांपों को आकर्षित नहीं करती. वहीं साधु-संतों और योगियों के आस-पास सांप निडर होकर घूमते हैं, लेकिन उन्हें काटते नही हैं.

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