लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पूर्व आयोजित हो रहे राज्यसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं समाजवादी पार्टी (सपा) के मध्य राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बनते दिख रहे हैं। इस निर्वाचन में क्रॉस वोटिंग, विधायकों की अनुपस्थिति तथा दलबदल की प्रबल संभावनाएं उत्पन्न हो रही हैं, जिससे अनेक जनप्रतिनिधियों के भावी चुनावी टिकट भी प्रभावित हो सकते हैं। सपा अपने अतिरिक्त मतों को एकजुट रखते हुए तीसरा प्रत्याशी मैदान में उतारने की रणनीति पर विचार कर रही है।
राज्यसभा की दस सीटों का समीकरण
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर निर्वाचन संपन्न होना है। वर्तमान दलीय निष्ठा के आधार पर भाजपा सात सीटों पर आसानी से विजय प्राप्त कर सकती है, जबकि आठवें उम्मीदवार की जीत के लिए उसे कुछ अतिरिक्त मतों की आवश्यकता होगी। यदि सपा केवल दो सीटों पर संतोष करती है, तो सभी प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे और मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
सपा गठबंधन के पास कांग्रेस के दो विधायकों को मिलाकर कुल 103 सदस्यों का बल है, जिसके माध्यम से दो सीटें सुगमतापूर्वक जीती जा सकती हैं। इसके पश्चात सपा के पास 29 अधिशेष वोट बचते हैं। सपा नेतृत्व का आकलन है कि यदि 8 अन्य विधायकों का सहयोग प्राप्त हो जाता है, तो तीसरी सीट के लिए आवश्यक आंकड़ा जुटाया जा सकता है।
सहयोगी दलों के विधायकों पर सपा की दृष्टि
सपा की दृष्टि सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दलों के उन विधायकों पर टिकी है जो आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने की अनिश्चितता को लेकर असमंजस में हैं। दूसरी ओर, यदि भाजपा आठवां प्रत्याशी मैदान में उतारती है, तो सपा के समक्ष अपने विधायकों को क्रॉस वोटिंग से बचाने की गंभीर चुनौती होगी। उल्लेखनीय है कि पूर्व में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा खेमे से कई विधायकों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया था।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का वर्तमान गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों में से वर्तमान में 397 सदस्य कार्यरत हैं, जबकि 6 स्थान विधायकों के निधन के कारण रिक्त हैं।
जीत का कोटा: एक प्रत्याशी को विजयी होने के लिए प्रथम वरीयता के लगभग 37 से 39.7 वोटों की आवश्यकता है।
सपा का गणित: सपा अपने बलबूते 2 सीटें जीत सकती है। तीसरी सीट के लिए उसे 8 अतिरिक्त मतों की दरकार है।
भाजपा व अन्य दलों की स्थिति: विधानसभा में भाजपा के 256, सपा के 101, अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोकदल के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6, और निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल के 5 विधायक हैं। इसके अतिरिक्त कांग्रेस तथा जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के 2-2 विधायक हैं।
बागी विधायक: सपा से बगावत करने वाले तीन विधायक (अभय सिंह, मनोज पांडेय एवं राकेश प्रताप सिंह) असंबद्ध हैं, जबकि चार अन्य बागी विधायक भी भाजपा के साथ दिख रहे हैं।
क्रॉस वोटिंग, मतदान से अनुपस्थिति और द्वितीय वरीयता के वोटों का हस्तांतरण ऐन वक्त पर चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।


