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    “तेज आंधी और बारिश बनी काल: दमोह में भूसे की ट्रॉली पलटने से एक मजदूर की मौत, घायलों को अस्पताल में कराया भर्ती”

    दमोह | मध्य प्रदेश के दमोह जिले में भीषण तपिश के बीच अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। देर रात आए तेज आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई। इस खराब मौसम के दौरान भूसे से ओवरलोड एक ट्रैक्टर-ट्रॉली असंतुलित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में ट्रॉली के नीचे दबने से एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य श्रमिक चोटिल हो गए। घायलों को तुरंत नजदीकी चिकित्सालय ले जाया गया है। इस अप्रत्याशित घटना के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई।

    आंधी-तूफान के बीच अनियंत्रित होकर पलटी ट्रॉली

    यह दुखद घटना देहात थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सागर नाका चौकी के बरमासा गांव की है। चश्मदीदों के अनुसार, रात के समय गर्मी से थोड़ी राहत मिलने पर कुछ मजदूर खेत में ट्रैक्टर-ट्रॉली के भीतर भूसा लादने का काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज अंधड़ के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। हवा का वेग इतना तीव्र था कि चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा और भूसे से भरी ट्रॉली पलट गई। इस दुर्घटना में बरपटी गांव का रहने वाला श्रमिक टीकाराम यादव गाड़ी के नीचे बुरी तरह फंस गया। वहां मौजूद साथियों और ग्रामीणों ने उसे निकालने का काफी प्रयास किया, लेकिन वे उसे बचा नहीं सके।

    अस्पताल में एक मृत घोषित, अन्य घायलों का उपचार जारी

    हादसे के तुरंत बाद सभी प्रभावितों को जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद टीकाराम यादव को मृत घोषित कर दिया। हादसे में घायल हुए दो अन्य मजदूरों का इलाज अस्पताल में चल रहा है, जिनमें से एक की स्थिति नाजुक बनी हुई है और दूसरे को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। इस अप्रत्याशित चक्रवात ने एक हंसते-खेलते परिवार के कमाऊ सदस्य को हमेशा के लिए छीन लिया, जिससे पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

    मजदूरों की सुरक्षा को लेकर खड़े हुए सवाल

    घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मर्ग कायम कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस प्रशासन हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने में जुटा है। हालांकि, इस दर्दनाक वाकये ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं के समय खेतों और खुले आसमान के नीचे काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था और उनकी कार्यदशाओं को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

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