नई दिल्ली: ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और उसकी राज्यसभा सदस्य डोला सेन की उस विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय हुई है, जिसमें केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पार्टी के तीन बैंक खातों से लेन-देन पर रोक लगाने के कदम को चुनौती दी गई है। सर्वोच्च न्यायालय की दैनिक वाद सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।
कलकत्ता हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को दी गई है चुनौती
याचिकाकर्ताओं ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले के विरुद्ध शीर्ष अदालत का रुख किया है, जिसके तहत धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17(1-A) के अंतर्गत बैंक खातों को फ्रीज करने के ED के आदेश पर अंतरिम स्टे देने से मना कर दिया गया था।
तीन प्रमुख बैंक खातों से जुड़ता है विवाद
यह मामला तृणमूल कांग्रेस के एचडीएफसी बैंक स्थित तीन खातों से संबंधित है। बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिक शिकायत के आधार पर ED ने जून में ईसीआईआर (ECIR) दर्ज की थी, जिसके तुरंत बाद इन खातों से निकासी (डेबिट) पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने क्यों नहीं दी अंतरिम राहत?
हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने अपने फैसले में टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया अंतरिम राहत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। अदालत के अनुसार, सुविधा और असुविधा का संतुलन भी याचिकाकर्ताओं के पक्ष में सिद्ध नहीं होता।
वित्तीय लेन-देन को लेकर ED का दावा
अदालत ने उल्लेख किया कि जांच एजेंसी द्वारा जमा खातों की समीक्षा करने पर केयरवेल समूह सहित कई अन्य संस्थाओं के साथ बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन का संकेत मिला है। अदालत का मानना है कि अंतरिम सुनवाई के चरण में इन लेन-देन की वैधता तय नहीं की जा सकती और याचिकाकर्ता अपनी बात PMLA के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।
पार्टी के अन्य खाते अब भी चालू
अदालत के आदेश में दर्ज तथ्यों के अनुसार, जांच एजेंसी ने केवल छह चुनिंदा खातों को ही सीज किया है, जबकि पार्टी के 36 अन्य बैंक खाते पूर्ववत संचालित हो रहे हैं, जिनमें 164 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सुरक्षित है।
ED की आपत्तियों पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
हालांकि अंतरिम राहत याचिका खारिज कर दी गई, लेकिन हाईकोर्ट ने ED की इस दलील को भी अस्वीकार कर दिया कि याचिका पोषणीय नहीं है। अदालत ने माना कि पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा दायर याचिका नियमानुसार है और वैकल्पिक मंच उपलब्ध होने से संवैधानिक अदालत का दायरा सीमित नहीं होता।
जांच एजेंसी का पक्ष और प्राथमिक मामला
ED के मुताबिक, जांच में करीब 164 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली है। एजेंसी का आरोप है कि अनुचित साधनों, प्रभाव के इस्तेमाल और संदिग्ध गतिविधियों से प्राप्त धनराशि का प्रवाह इन खातों के माध्यम से हुआ है। साइबर क्राइम पुलिस द्वारा बीएनएस (BNS) और आईटी एक्ट के तहत दर्ज प्रकरण को ही ED ने PMLA जांच का आधार बनाया है।
याचिका में तृणमूल कांग्रेस की दलील
पार्टी का पक्ष है कि बैंक खातों को फ्रीज करने का निर्णय बिना किसी स्पष्ट 'अपराध की आय' की पहचान किए मनमाने ढंग से लिया गया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य के वर्तमान राजनीतिक परिवेश में उसके विरुद्ध दबाव बनाने की नीयत से यह दंडात्मक कदम उठाया गया है।


