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    मौत के 5 साल बाद पहुंचा टैक्स नोटिस, हाई कोर्ट ने आयकर विभाग को लगाई फटकार

    अहमदाबाद:गुजरात हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आयकर विभाग (इनकम टैक्स डिपार्टमेंट) की उस दंडात्मक कार्रवाई पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिसके तहत विभाग एक मृत महिला के टैक्स मूल्यांकन को फिर से शुरू करने का प्रयास कर रहा था। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार यह मामला बेहद चौंकाने वाला था क्योंकि जिस महिला के खिलाफ विभाग ने डिमांड नोटिस जारी किया था, उसकी मृत्यु नोटिस मिलने से करीब पांच वर्ष पहले ही हो चुकी थी। अदालत के इस रुख के बाद कर विभाग की इस एकतरफा और त्रुटिपूर्ण कार्यवाही को बड़ा झटका लगा है।

    हाई कोर्ट की खंडपीठ ने टैक्स विभाग के दोबारा मूल्यांकन आदेश को किया रद

    इस संवेदनशील और कानूनी पेचीदगी से भरे मामले की सुनवाई गुजरात हाई कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और जस्टिस वी.डी. नानावटी की संयुक्त खंडपीठ में हुई। खंडपीठ ने मामले के सभी तथ्यों और तारीखों का गहन अध्ययन करने के बाद आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए दोबारा मूल्यांकन के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। अदालत ने माना कि एक मृत नागरिक के नाम पर इस तरह की कानूनी कार्यवाही को आगे बढ़ाना वैधानिक रूप से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

    जमीन के सौदे पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स से जुड़ा था पूरा मामला

    यह पूरा विवाद दरअसल एक जमीन के सौदे से उत्पन्न हुआ था, जिसे दिवंगत महिला ने अपने जीवनकाल में पूरा किया था। आयकर विभाग का मानना था कि इस भूखंड के क्रय-विक्रय के सौदे पर नियमानुसार लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होता है, जिसकी सही तरीके से गणना नहीं की गई थी। इसी टैक्स राशि के निर्धारण और वसूली के उद्देश्य से विभाग ने मृत महिला के नाम पर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसे अब अदालत ने कानूनी रूप से अमान्य घोषित कर दिया है।

    मृत व्यक्ति के खिलाफ टैक्स कार्यवाही जारी रहने के कानूनी सवाल पर रुख साफ

    आयकर विभाग की वर्तमान कार्रवाई को पूरी तरह से रद करने के बावजूद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इससे जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी सवाल को भविष्य की समीक्षा के लिए खुला छोड़ दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस बात पर विचार होना अभी बाकी है कि यदि किसी मृत व्यक्ति के नाम पर आए नोटिस का जवाब उसके परिवार के सदस्य या कानूनी वारिस विभाग को दे देते हैं, तो क्या वैसी स्थिति में मृत व्यक्ति के खिलाफ टैक्स की कानूनी कार्यवाही को निरंतर जारी रखा जा सकता है या नहीं।

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