More
    Homeदुनिया'देश का सिस्टम ढह चुका है', मोहसिन नकवी के बयान से पाकिस्तान...

    ‘देश का सिस्टम ढह चुका है’, मोहसिन नकवी के बयान से पाकिस्तान की राजनीति में हलचल

    इस्लामाबाद| पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश की बदहाल स्थिति पर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की मौजूदा शासन-व्यवस्था पूरी तरह से ढह चुकी है और अब यह देश की गंभीर चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह असमर्थ है। इस्लामाबाद में आयोजित पहले 'पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था में हम जी रहे हैं, वह अब समाप्त हो चुकी है। उन्होंने माना कि पिछले 70 सालों से इस पुरानी व्यवस्था को घसीटा जा रहा है और मौजूदा प्रणाली के माध्यम से देश की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।

    प्रशासनिक सुधारों और नए प्रांतों की वकालत

    गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने नए प्रशासनिक निकायों और नई इकाइयों (प्रांतों) के गठन की बात कही है। नकवी की यह मांग देश के कई प्रमुख राजनीतिक दलों की उस पुरानी मांग से मेल खाती है, जिसमें बेहतर और सुगम शासन संचालन के लिए देश में और अधिक प्रांत बनाने पर जोर दिया जाता रहा है। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि अब पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व भी यह मानने लगा है कि मौजूदा ढर्रे पर देश को आगे चलाना असंभव है।

    রেকর্ড कर्ज का बोझ और विदेशी मुद्रा भंडार का गंभीर संकट

    वर्तमान में पाकिस्तान अपने इतिहास के सबसे भीषण आर्थिक दौर से गुजर रहा है। देश का कुल विदेशी कर्ज लगभग 137 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, जिसमें अकेले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का करीब 8.8 अरब डॉलर शामिल है। देश का कुल सरकारी कर्ज उसकी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 70% से 80% तक पहुंच गया है। स्थिति यह है कि सरकार के बजट का लगभग दो-तिहाई हिस्सा केवल पुराने कर्जों का ब्याज चुकाने में ही खर्च हो जाता है। इसके अलावा, देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी बेहद दयनीय स्थिति में है।

    IMF और मित्र देशों की बैसाखियों पर टिकी अर्थव्यवस्था

    अपनी अर्थव्यवस्था को वेंटीलेटर से बाहर निकालने के लिए पाकिस्तान बार-बार IMF की शरण में जाने को मजबूर है। अपनी आजादी से लेकर अब तक पाकिस्तान कुल 25 बार IMF से बेलआउट पैकेज ले चुका है। IMF की कठोर शर्तों (जैसे भारी टैक्स लगाना, बिजली और ईंधन के दाम बढ़ाना तथा सब्सिडी खत्म करना) के कारण आम जनता त्रस्त है। इसके अलावा, सऊदी अरब, चीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे मित्र देशों से बार-बार कर्ज की मियाद बढ़वाकर (रोलोवर) और नकद सहायता मांगकर किसी तरह देश का कामकाज चलाया जा रहा है।

    प्रशासनिक नाकामी और ढांचागत बदहाली

    गृह मंत्री के इस बयान का एक बड़ा पहलू प्रशासनिक विफलता से भी जुड़ा है। 70 साल पुराना केंद्रीय ढांचा न तो प्रभावी तरीके से कर (टैक्स) वसूल पा रहा है और न ही नागरिकों को बुनियादी सुरक्षा और सुविधाएं दे पा रहा है। देश का कर-से-जीडीपी अनुपात मात्र 10% से 11% के बीच सिमटा हुआ है। भ्रष्टाचार, लालफीताशाही और संसाधनों के गलत वितरण के कारण पूरी शासन प्रणाली चरमरा चुकी है, जिसके चलते अब देश में छोटे प्रशासनिक ब्लॉक और नए प्रांत बनाने की मांग तेज हो गई है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here