वाराणसी घूमने या काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों के लिए साक्षी विनायक के दर्शन करना बहुत जरूरी माना जाता है. कहा जाता है कि यहां स्वयं साक्षी विनायक भक्तों की हाजिरी लगाते हैं कि वो काशी में आए थे. यहां भगवान गणेश को साक्षी यानी गवाह के रूप में पूजा जाता है. मान्यता यह है कि जब भी कोई भक्त काशी यात्रा पर आता है तो भगवान गणेश यहां उसकी यात्रा के गवाह बनते हैं और यह बात भगवान शिव तक पहुंचाते हैं. मान्यता है कि यहां दर्शन करने मात्र से भक्तों के अटके हुए सभी कार्य पूरे हो जाते हैं और जीवन में मंगल ही मंगल बना रहता है. आइए जानते हैं काशी के प्रसिद्ध गणेशजी के मंदिर के बारे में…
साक्षी विनायक का धार्मिक महत्व
गणेशजी का यह मंदिर विश्वनाथ गली में ही स्थित है और भले ही आकार में बहुत बड़ा या भव्य ना लगे, लेकिन इसका धार्मिक महत्व बेहद गहरा है. कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति काशी आकर यहां दर्शन नहीं करता, तो उसकी यात्रा अधूरी मानी जाती है. कहा जाता है कि आपने चाहे कितने ही बड़े मंदिरों के दर्शन कर लिए हों लेकिन अगर साक्षी विनायक के यहां हाजिरी नहीं लगी, तो यात्रा का पूरा फल नहीं मिलता.
इन लोगों के लिए मंदिर दर्शन करना जरूरी
खास तौर पर पंचकोसी परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए तो यहां आना और भी ज्यादा जरूरी होता है. पंचकोशी परिक्रमा काशी के आसपास लगभग 10 मील की एक धार्मिक यात्रा है, जिसे बहुत पवित्र माना जाता है. इस यात्रा को पूरा करने के बाद भक्त साक्षी विनायक मंदिर में आकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, ताकि उनकी यात्रा मान्य हो सके. साक्षी विनायक मंदिर में दर्शन करने मात्र से भक्तों के बिना किसी विघ्न के हर कार्य पूरे हो जाते हैं.
मंदिर में गणेशजी की ऐसी मूर्ति
साक्षी विनायक मंदिर की एक और खास बात यह है कि यहां भगवान गणेश के एक हाथ में कलम और दूसरे हाथ में पुस्तक है. इसका मतलब यह माना जाता है कि वे हर भक्त की यात्रा का लेखा-जोखा रखते हैं. कौन काशी आया, किसने दर्शन किए सबका रिकॉर्ड भगवान गणेश के पास रहता है. इसी वजह से उन्हें साक्षी विनायक कहा जाता है. माना जाता है कि इसका निर्माण 18वीं सदी में मराठा पेशवाओं द्वारा कराया गया था. यह एक चौकोर संरचना में बना है और देखने में सादा होने के बावजूद इसकी आस्था बहुत गहरी है.


