नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादी की पहचान लश्कर-ए-तैयबा संगठन के आतंकवादी उमर लोन के रूप में हुई है। उमर लोन 2018 से सक्रिय था और उसके ऊपर 10 लाख रुपये का इनाम भी था। राष्ट्रीय राइफल्स 3 सेक्टर के कमांडेंट ब्रिगेडियर विपुल त्यागी के मुताबिक, बांदीपोरा के अरागाम इलाके में पिछले कुछ समय से आतंकवादियों की गतिविधियों की खबरें मिल रही थीं। सुरक्षा बलों ने इस इलाके पर लगातार निगाह बनाई हुई थी। गत 16-17 जून को उन्हें एक गुप्त सूचना मिली, जिसके बाद भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने एक जॉइंट ऑपरेशन लॉन्च किया। ऑपरेशन के दौरान, एक पार्टी को कुछ संदिग्ध हरकत दिखाई दी। अचानक, आतंकी उमर लोन ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की और उमर लोन को मार गिराया। उमर लोन के मारे जाने के बाद इलाके में लोग खुश हैं, क्योंकि वह एक खतरनाक आतंकवादी था जिसकी करतूतें घिनौनी थीं। ब्रिगेडियर विपुल ने बताया कि उमर लोन 2018 से एक्टिव था। वर्तमान समय में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। उमर कई आतंकी गतिविधियों जैसे नए आतंकियों की भर्ती, नेटवर्क चलाना और गैर-काकनूनी कामों में शामिल था।
सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी कामयाबी
उमर लोन को मार गिराना सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी कामयाबी है। राष्ट्रीय राइफल्स 3 सेक्टर के कमांडेंट ब्रिगेडियर विपुल त्यागी ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने हाई ऑपरेशनल मोमेंटम बनाए रखा है, जिससे उन्हें कई महत्वपूर्ण सफलताएं मिली हैं और कई आतंकवादियों को मार गिराने में कामयाबी हासिल हुई है। इस कार्रवाई में जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोगों का भी भरपूर सहयोग मिला है। स्थानीय लोगों की सहायता से आतंकियों की गतिविधियों पर निगरानी रखना और सही समय पर जानकारी प्राप्त करना संभव हो पाया है। यह सहयोग सुरक्षा बलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है और इससे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मजबूती मिली है।
ए कैटेगरी का आतंकवादी था लोन
उमर लोन ‘कैटेगरी ए’ का आतंकवादी था और लश्कर-ए-तैयबा तथा द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) से जुड़ा हुआ था। उमर लोन ने आतंकवादी भर्ती, ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वर्कर्स) नेटवर्क चलाने और अवैध हत्याओं जैसी कई घिनौनी आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया था। वह पिछले 14 सालों से घाटी में सक्रिय था और निर्दोष लोगों को निशाना बनाता था। बताया जा रहा है कि उमर लोन के शरीर पर एके 47 से सेना ने गोलियां बरसाईं। उसने भी सेने के जवानों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। पोस्टमॉर्टम में उमर लोन के शरीर में 47 पीतल की गोलियां निकली हीं।

