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    महिला आरक्षण और परिसीमन पर संसद में बढ़े टकराव के आसार, विपक्ष ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली। संसद (Parliament) के विशेष सत्र (Special Session) में इस सप्ताह महिला आरक्षण (Women’s Reservation) और परिसीमन विधेयकों (Delimitation Bills) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी हुई। केंद्र सरकार जहां इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके पीछे की मंशा पर सवाल उठा रहा है।

    कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, विधेयक का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और इससे संसदीय लोकतंत्र को नुकसान हो सकता है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत चालाकी भरी है। वहीं, दक्षिण भारत के कई गैर-बीजेपी मुख्यमंत्रियों ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हितों को नुकसान पहुंचा या उत्तरी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ाया गया, तो तमिलनाडु में व्यापक आंदोलन होगा।

    तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सिर्फ जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों का बंटवारा करने से संघीय संतुलन बिगड़ सकता है और दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा। रेड्डी ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों को भी पत्र लिखकर इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि बिना राज्यों की सहमति के कोई भी फैसला व्यापक विरोध को जन्म देगा।

    तमिलनाडु नहीं रहेगा खामोश: स्टालिन
    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ तीखा रुख अपनाते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, यदि इस प्रक्रिया से तमिलनाडु को नुकसान हुआ या उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति असंतुलित रूप से बढ़ाई गई, तो राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य का हर परिवार सड़कों पर उतरेगा और उनके नेतृत्व में एक विशाल जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। यह मत सोचिए कि चुनाव के समय ध्यान कहीं और है और आप दिल्ली में चुपचाप परिसीमन कर लेंगे। अगर तमिलनाडु के साथ अन्याय हुआ, तो पूरा देश इसे महसूस करेगा। स्टालिन ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीयता में लिपटी हुई है। न तो उनकी पार्टी डीएमके और न ही किसी अन्य राजनीतिक दल या राज्य से इस पर कोई परामर्श किया गया है। उन्होंने कहा, हमें यह तक नहीं बताया गया है कि यह परिसीमन कैसे किया जाएगा।

    किसी के भी साथ नहीं होगा अन्याय: रिजिजू
    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा सीटों के परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को नुकसान होने की आशंका सिरे से खारिज कर दी। उन्होंने कहा, संविधान संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 किए जाने से दक्षिणी राज्यों को लाभ होगा, क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या में आनुपातिक वृद्धि की जाएगी।

    रिजिजू ने जोर देकर कहा, संविधान संशोधन विधेयक पूरी तरह से संतुलित, सुविचारित है और प्रत्येक समुदाय, क्षेत्र और राज्य की आकांक्षाओं का ध्यान रखेगा। इसलिए इसकी आलोचना की कोई गुंजाइश नहीं है। अगर कोई नीतियों और कार्यक्रमों के संदर्भ में इसकी आलोचना करता है, तो राजनीतिक क्षेत्र में यह पूरी तरह से समझ में आता है। लेकिन विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का कोई भी दल विरोध नहीं कर रहा है। मंत्री ने कहा, यह केवल सरकार का विधेयक नहीं है, बल्कि यह सभी राजनीतिक दलों और पूरे देश का किसी न किसी रूप में विधेयक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी दल एकजुट होकर महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य का समर्थन करेंगे।

    सरकार के पास नहीं है अपने दम पर दो तिहाई बहुमत
    यदि कांग्रेस ने सरकार का साथ नहीं दिया तो उसे इन विधेयकों को पारित कराना मुश्किल होगा क्योंकि नियमत: किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में मौजूद सदस्यों के दो तिहाई बहुमत की जरूरत है। सरकार के पास अपने दम पर लोकसभा या राज्यसभा, कहीं भी यह बहुमत नहीं है। लोकसभा में दो तिहाई बहुमत की संख्या 362 है जबकि एनडीए के पास कुल 292 सदस्य ही है। इसी तरह राज्यसभा में दो तिहाई का आंकड़ा 163 का है जबकि सरकार के पास 141 सदस्य ही हैं।

    विपक्ष की बैठक आज
    महिला आरक्षण विधेयक और लोकसभा-विधानसभा सीटों के परिसीमन पर विचार करने के लिए कांग्रेस समेत विपक्ष के सभी दल बुधवार को बैठक करेंगे। दक्षिण के राज्यों के विरोध को देखते हुए यह माना जा रहा है कि कांग्रेस इन बदलावों का समर्थन करने से हाथ खींच ले।
     

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