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    कलावा उतारने के बाद ये गलती भारी पड़ सकती है, भूलकर भी न करें ये काम

    कलावा मात्र सूत का धागा नहीं, बल्कि एक रक्षा कवच है। जिस तरह हम पूजा की अन्य सामग्रियों का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार पुराने कलावे का विसर्जन भी शास्त्रोक्त विधि से ही करना चाहिए। आइए जानते हैं इसे उतारने के सही नियम क्या हैं:

    भूलकर भी न करें ये 'एक' गलती
    अक्सर लोग कलावा पुराना होने पर उसे उतारकर कूड़ेदान में डाल देते हैं या कहीं भी सड़क पर फेंक देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, ऐसा करना अशुभ माना जाता है। इससे न केवल वास्तु दोष उत्पन्न होता है, बल्कि राहु और केतु जैसे ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव भी बढ़ सकते हैं। चूंकि यह पूजा के समय संकल्प लेकर बांधा जाता है, इसलिए इसका अपमान नहीं करना चाहिए।

    कलावा विसर्जन के सही नियम
    उचित दिन का चुनाव: कलावा किसी भी समय या दिन नहीं उतारना चाहिए। इसके लिए मंगलवार और शनिवार का दिन सबसे शुभ माना गया है।

    हथियार का न करें प्रयोग: कलावा उतारते समय कभी भी कैंची, चाकू या किसी नुकीली धातु का प्रयोग न करें। इसे हमेशा अपने हाथों से खोलकर ही उतारना चाहिए।

    नया कलावा तुरंत बांधें: पुराना कलावा उतारने के तुरंत बाद हाथ खाली न रखें; नया रक्षा सूत्र अवश्य बांध लें।

    ईष्ट देव का स्मरण: कलावा खोलते समय अपने ईष्ट देव का ध्यान करें और जीवन में सुख-समृद्धि व सुरक्षा की प्रार्थना करें।

    कहाँ करें विसर्जन?
    यदि आपने कलावा उतार लिया है, तो इसे इन तरीकों से विसर्जित कर सकते हैं:

    वृक्ष की जड़: इसे पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे सम्मानपूर्वक रख दें।

    जल प्रवाह: किसी पवित्र नदी या बहते हुए शुद्ध जल में इसे प्रवाहित करना सबसे उत्तम है।

    गमले की मिट्टी: यदि आप शहर में हैं और आसपास नदी या पेड़ नहीं है, तो इसे अपने घर के किसी साफ गमले की मिट्टी में गहराई में दबा दें।

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