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    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर टीकाराम जूली बोले- प्रधानमंत्री तुरंत इसे स्वीकार करें

    जयपुर: नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर पर राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस घटनाक्रम को देश भर के छात्रों और युवाओं के लंबे एवं अटूट संघर्ष की ऐतिहासिक जीत करार दिया। जूली ने कहा कि नैतिक आधार पर शिक्षा मंत्री का यह इस्तीफा बहुत पहले आ जाना चाहिए था, फिर भी देर से लिया गया यह निर्णय स्वागत योग्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे बिना किसी विलंब के इस इस्तीफे को तत्काल स्वीकार करें।

    देशभर के युवाओं की एकजुटता और संघर्ष का सुखद परिणाम

    नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जोर देकर कहा कि शिक्षा मंत्री का पद से हटना महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं के संकल्प की जीत है जो सड़कों पर अपने हक के लिए डटे रहे। उन्होंने उल्लेख किया कि विपक्षी दल लगातार इस संवेदनशील मुद्दे को संसद से लेकर सड़कों तक पुरजोर तरीके से उठा रहे थे। अंततः देश के युवाओं और छात्रों के भारी दबाव के आगे केंद्र सरकार को झुकना ही पड़ा और जवाबदेही तय करनी पड़ी।

    प्रदर्शनकारी परीक्षार्थियों पर लाठीचार्ज करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग

    आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों पर किए गए बल प्रयोग की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए जूली ने न्याय की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अपने भविष्य की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे मासूम छात्रों पर लाठियां बरसाने, आंसू गैस के गोले दागने और बल प्रयोग करने वाले सभी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी छात्र आंदोलन का इस तरह दमन न किया जा सके।

    छात्रों को बदनाम करने वाले भाजपा नेताओं के बयानों पर घेराबंदी

    टीकाराम जूली ने भारतीय जनता पार्टी के प्रादेशिक नेतृत्व और राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को निशाने पर लेते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान भाजपा नेताओं ने छात्रों को बेहद अपमानजनक शब्द कहे। उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों को बाहरी तत्वों और असामाजिक तत्वों से जोड़कर प्रचारित किया गया था। जूली ने सवाल किया कि अब जब सच्चाई सामने आ चुकी है और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा है, तब पार्टी उन गैर-जिम्मेदाराना बयान देने वाले अपने नेताओं पर क्या कार्रवाई करेगी।

    युवा शक्ति के आगे झुकी सरकार और लोकतंत्र की जीत

    अपने वक्तव्य के समापन में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जब केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को भारत की युवा शक्ति के वास्तविक सामर्थ्य का अहसास हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश का जागरूक युवा वर्ग इसी प्रकार संगठित रहकर भविष्य में भी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा और पारदर्शी शासन प्रणाली सुनिश्चित कराएगा।

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