वडोदरा। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से बगावती तेवर अपनाने वाले पूर्व ऑलराउंडर और सांसद यूसुफ पठान के आवासीय भूखंड से जुड़े विवाद में एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) के उस दावे को विधि सम्मत ठहराए जाने के बाद, जिसमें यूसुफ पठान पर अपने घर के बगल वाली सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप था, कोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर को सख्त फटकार लगाई थी। अब इस कानूनी रस्साकशी के बीच जहां यूसुफ पठान के टीएमसी से नाता तोड़ने की सियासी चर्चाएं तेज हैं, वहीं वडोदरा नगर निगम ने शहर के सात प्रमुख भूखंडों को सार्वजनिक नीलामी पर चढ़ाने का बड़ा फैसला किया है, जिसमें पठान के कब्जे वाला विवादित प्लॉट भी शामिल है। ज्ञात हो कि पूर्व क्रिकेटर वडोदरा के तांदलजा क्षेत्र में निवास करते हैं।
विवादित भूखंड सहित सात प्लॉटों की नीलामी करेगा वडोदरा नगर निगम
यूसुफ पठान द्वारा नगर निगम की इस बेशकीमती भूमि को अपने कब्जे में लेने का यह पूरा मामला उनके टीएमसी के टिकट पर सांसद चुने जाने के बाद मुख्यधारा में आया था। उस दौरान भाजपा के स्थानीय पार्षद नितिन डोंगा द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद निगम प्रशासन ने पठान को बेदखली का नोटिस थमाया था। वीएमसी के इस सख्त नोटिस के खिलाफ यूसुफ पठान ने राहत की उम्मीद में गुजरात हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए उन्हें कोई भी राहत देने से साफ इनकार कर दिया था। अब इस पूरे प्रकरण में कड़ा रुख अपनाते हुए वीएमसी ने इस जमीन को सीधे नीलाम करने का निर्णय लिया है और स्टैंडिंग कमेटी की चेयरमैन वर्षाबेन व्यास ने स्पष्ट किया है कि आगामी सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं नियमों के दायरे में ही पूरी की जाएंगी।
चौदह वर्षों के अवैध कब्जे का जुर्माना वसूलने और बीस करोड़ बेस प्राइस की मांग
दूसरी ओर, 'विश्वामित्री बचाओ समिति' के प्रमुख और सामाजिक कार्यकर्ता शैलेष अमीन ने इस मामले में एक नई मांग उठाकर प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। अमीन का तर्क है कि इस भूखंड को सीधे तौर पर नीलाम करने से पहले वीएमसी को यूसुफ पठान द्वारा किए गए इतने लंबे समय के अवैध कब्जे के लिए हर्जाना और किराया वसूलना चाहिए, जिसकी गणना यदि वर्ष 2012 से की जाए तो यह राशि करोड़ों रुपये बैठती है। वर्तमान में नगर निगम ने इस 978 वर्ग मीटर के विशाल भूखंड का शुरुआती मूल्य (ऑक्शन वैल्यू) लगभग 20 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। हालांकि, स्थानीय हलकों में यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि जमीन का वास्तविक कब्जा पूरी तरह से खाली कराए बिना ही निगम इसे नीलाम कैसे कर सकता है, जिस पर फिलहाल वीएमसी के आला अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
तबेले के आवेदन से शुरू हुआ विवाद और राजस्व जुटाने का प्रशासनिक लक्ष्य
इस पूरे भूमि विवाद के आधिकारिक दस्तावेजों को खंगालने पर पता चलता है कि यूसुफ पठान ने साल 2012 में इस सरकारी जमीन पर अस्तबल (तबेला) बनाने के उद्देश्य से इसके आवंटन के लिए वीएमसी के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया था। हालांकि, इस आवंटन की प्रक्रिया को राज्य सरकार की अंतिम स्वीकृति न मिलने के कारण खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद इस जमीन को खाली कराने के लिए वीएमसी का बुलडोजर एक्शन भी प्रस्तावित था। अब नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में जिन सात भूखंडों को बेचने का खाका तैयार किया गया है, वे शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं और इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की जमीनों को पूर्ण पारदर्शिता के साथ बेचकर निकाय के लिए वित्तीय राजस्व जुटाना है, जिसके लिए प्रस्ताव को जल्द ही जनरल बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा।


