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    तुलसी विचार मंच ने मनाई तुलसी जयंती, स्वामी गंगादास वेदांती बोले – मानस है मनुष्यता की आचार संहिता

    तुलसी विचार मंच ने श्रद्धा और गरिमा से मनाई तुलसी जयंती, स्वामी गंगादास वेदांती बोले – “मानस मनुष्यता की आचार संहिता है”

    मिशनसच न्यूज, अलवर।
    अलवर के नया बास स्थित एक शैक्षिक संस्थान के सभागार में मंगलवार को तुलसी विचार मंच द्वारा तुलसी जयंती समारोह अत्यंत आध्यात्मिक, साहित्यिक व भक्ति रसपूर्ण वातावरण में मनाया गया। समारोह में अयोध्या धाम आश्रम से पधारे महंत स्वामी गंगादास वेदांती महाराज ने अपने आशीर्वचनों में कहा –

    “सनातन संस्कृति की रक्षा और जीवन की हर समस्या के समाधान के लिए रामचरित मानस रामबाण है। मानस वास्तव में मनुष्यता की आचार संहिता है।”

    विद्वानों ने किया रामचरित मानस का भावपूर्ण विश्लेषण

    कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार बलवीर सिंह ‘करुण’ और डॉ. जे. सी. नारायणन ने रामचरित मानस के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए आधुनिक जीवन में मानस की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। दोनों वक्ताओं ने मानस को जीवन दर्शन, आचार-व्यवहार और धार्मिक चेतना का अद्वितीय ग्रंथ बताया।

    तुलसी साहित्य पर हुआ विमर्श, संत-शिक्षक सम्मानित

    पं. धर्मवीर शर्मा ने समारोह में उपस्थित गणमान्य जनों का स्वागत करते हुए गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य और जीवन पर प्रकाश डाला।
    इस अवसर पर डॉ. शकुंतला तिवारी विशेष अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहीं। वहीं विगत वर्षों से रामचरित मानस का नियमित गायन करने वाले घनश्याम सैनी को सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह और पटका भेंट कर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया

    वैदिक विधि से हुआ शुभारंभ

    कार्यक्रम का शुभारंभ गोस्वामी तुलसीदास जी के चित्र पर मंचस्थ अतिथियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन, पुष्पांजलि और तिलक लगाकर किया गया। यह दृश्य श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत समन्वय था।

    संगीत और भक्ति से गूंजा सभागार

    कार्यक्रम की शुरुआत में अलवर के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक महेश खेड़ापति ने तुलसी रचित भजन प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
    समारोह के समापन पर नवीन, जतिन और साहिल द्वारा संगीतबद्ध हनुमान चालीसा का सरस पाठ किया गया, जिसे श्रोताओं ने मंत्रमुग्ध होकर सुना।

    संचालन और संयोजन

    कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि रामचरण ‘राग’ द्वारा सरस और प्रभावी शैली में किया गया।
    तुलसी विचार मंच के संयोजक कुलदीप शर्मा ने सभी अतिथियों, सहभागियों एवं संस्थानों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि “तुलसीदास का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना पांच सौ वर्ष पूर्व था।

    विभिन्न संस्थाओं की भागीदारी

    इस आयोजन में अलवर के कई प्रमुख संस्थानों की भागीदारी रही –
    राजदीप परिवार, वैदिक ब्राह्मण संघ, परशुराम कला मंदिर, सृजक संस्थान, चाणक्य परिवार, राष्ट्रीय कवि संगम, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, सीलीसेढ़ मित्र मंडली आदि।
    उपस्थित गणमान्य जनों में शामिल थे:
    विश्वम्भर दयाल वशिष्ठ, डॉ. गोपाल शास्त्री, मोहित पंडित, मंहत धर्मेन्द्र शर्मा, योगेश वशिष्ठ, विजय सारस्वत, अशोक उपाध्याय, गिरीश गुप्ता, राम लाल यादव, विजय भारद्वाज, गोकुल राम शर्मा ‘दिवाकर’, अमरीक सिंह ‘अदब’, रचना आसोपा, मनीष गुप्ता, पी. के. शर्मा, कपिल शर्मा, मधु यादव, बृज मोहन पाठक, अशोक आहूजा, ओ. पी. शर्मा, प्रमोद विजय, अरविन्द शास्त्री, अनुरिता झा, डॉ. भगवान सहाय शर्मा, महेश, क्षितिज माथुर, विवेकानंद गुरु, श्रवण सिंह, विनय चावल।

    यह आयोजन केवल तुलसी जयंती का उत्सव नहीं था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, साहित्य और अध्यात्म के मूल स्रोत मानस को समझने और अपनाने की प्रेरणा का केंद्र बन गया।

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