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    Homeराजस्थानकोटाKota के न्यू मेडिकल कॉलेज में अनोखा मामला, युवक ने किया हवन-पूजन

    Kota के न्यू मेडिकल कॉलेज में अनोखा मामला, युवक ने किया हवन-पूजन

    कोटा: अस्पताल में 'आत्मा' लेने पहुंचा बेटा, ऑक्सीजन प्लांट के पास तांत्रिक क्रियाएं देख सन्न रह गए लोग

    कोटा: राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में गुरुवार को अंधविश्वास का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। भीलवाड़ा जिले से आए एक युवक ने अस्पताल के भीतर अपने पिता की 'आत्मा' को वापस ले जाने के लिए तांत्रिक अनुष्ठान शुरू कर दिया, जिसे देख वहां मौजूद मरीज और उनके परिजन दंग रह गए।

    तांत्रिकों की सलाह पर पहुंचा अस्पताल

    जानकारी के अनुसार, भीलवाड़ा के छोटी बिजौलिया का रहने वाला दिनेश प्रजापति अपने पिता की आत्मा लेने अस्पताल पहुंचा था। बताया जा रहा है कि दिनेश के परिवार में लंबे समय से परेशानियां चल रही थीं। कथित तौर पर कुछ तांत्रिकों ने उसे झांसा दिया कि उसके पिता की आत्मा अस्पताल परिसर में ही भटक रही है और उसे विशेष पूजा-पाठ के जरिए ही वापस ले जाया जा सकता है।

    ICU में एंट्री नहीं मिली तो ऑक्सीजन प्लांट को बनाया केंद्र

    युवक के पिता की कुछ समय पहले इसी अस्पताल के आईसीयू (ICU) वार्ड में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मंगलवार से ही परिजन अस्पताल में जमा थे और उन्होंने वार्ड के भीतर पूजा करने की अनुमति मांगी थी। अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा और नियमों का हवाला देते हुए उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद युवक गेट नंबर चार के पास स्थित ऑक्सीजन प्लांट क्षेत्र में पहुंच गया और वहां जमीन पर सामग्री रखकर मंत्रोच्चार और तांत्रिक क्रियाएं करने लगा।

    भीड़ और चर्चा का विषय बनी घटना

    अस्पताल परिसर में सरेआम चल रहे इस अनुष्ठान को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। काफी देर तक चले इस ड्रामे के बाद पूरे इलाके में अंधविश्वास को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि युवक पूरी तरह अंधविश्वास की गिरफ्त में था और किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था।

    पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

    गौरतलब है कि न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अंधविश्वास से जुड़ी यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार परिजन अपने मृतक रिश्तेदारों की 'आत्मा' लेने के नाम पर यहां इस तरह की गतिविधियां कर चुके हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वे मरीजों की शांति और संक्रमण के खतरे को देखते हुए ऐसी गतिविधियों को रोकने का प्रयास करते हैं, लेकिन कई बार धार्मिक भावनाओं के नाम पर लोग अड़ जाते हैं।

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