लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने दावा किया है कि उनका आधिकारिक WhatsApp अकाउंट बंद कर दिया गया है। उन्होंने इसके पीछे राजनीतिक साजिश का आरोप लगाते हुए इसे सरकार की नीतियों और घोटालों के खिलाफ आवाज बुलंद करने की सजा करार दिया है। उन्होंने इस बात की जानकारी अपने आधिकारिक फेसबुक पेज के माध्यम से साझा की है।
अजय राय का बड़ा आरोप—'दबाव में बंद हुआ अकाउंट'
फेसबुक पर अपनी पोस्ट में अजय राय ने लिखा कि तानाशाही अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की नीतियों, घोटालों और विफलताओं के खिलाफ लगातार मुखर रहने के कारण उन्हें यह सजा दी गई है। उनके मुताबिक, राजनीतिक दबाव के चलते उनका WhatsApp अकाउंट बैन किया गया है, और तो और उन्हें रिव्यू (समीक्षा) का विकल्प भी नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि भाजपा चाहे जितने भी डिजिटल हथकंडे अपना ले, कांग्रेस पार्टी जनता के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से लड़ती रहेगी।
Meta और WhatsApp से खाते की बहाली की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म WhatsApp और उसकी मूल कंपनी Meta से तत्काल प्रभाव से अपना अकाउंट बहाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि WhatsApp टीम और Meta को बिना किसी देरी के इस खाते को रिस्टोर करना चाहिए।
हल्द्वानी वाकया: 'दलित समाज का अपमान'
इससे पहले अजय राय ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद आरएसएस (RSS) और भाजपा से जुड़े कुछ संगठनों द्वारा उस स्थल के 'शुद्धिकरण' किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया था। उन्होंने इसे भाजपा और आरएसएस की दलित विरोधी मानसिकता का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया।
अजय राय ने तीखे शब्दों में कहा कि यह घटना केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का नहीं, बल्कि संपूर्ण दलित समाज का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस चाहे जितने भी सहभोज के आयोजनों का दिखावा कर लें, उनकी असली सोच ऐसे कृत्यों के माध्यम से उजागर हो ही जाती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस प्रकरण पर संसद के भीतर जवाब देने और भाजपा-आरएसएस से देश के दलित समाज से माफी मांगने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
तारीख 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस पार्टी द्वारा 'विजय शंखनाद रैली' का आयोजन किया गया था, जिसमें मल्लिकार्जुन खरगे समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता शामिल हुए थे। इस आयोजन के ठीक दो दिन बाद, यानी 10 अगस्त को 'श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास' नामक संगठन ने उसी मैदान में हवन-पूजन किया और गंगाजल का छिड़काव किया था। संगठन का तर्क था कि यह कार्यक्रम स्थल की पवित्रता को पुनः स्थापित करने के लिए किया गया था। इस घटना के सामने आने के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और आरोप लगाया कि यह कदम रैली में शामिल दलित नेताओं की उपस्थिति के कारण उठाया गया 'शुद्धिकरण' है।


