मेरठ। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि वह चौबीसों घंटे और बारह महीने चुनावी मुद्रा में रहने वाला संगठन है। इसी रणनीति के तहत, राज्य में साल 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में भले ही अभी लंबा वक्त बचा हो, लेकिन मेरठ जिले में पार्टी आलाकमान ने अपनी चुनावी मशीनरी और संगठन को पूरी तरह से गतिशील कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफल 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे देशव्यापी जनसंपर्क अभियान को पार्टी ने जमीनी स्तर पर संगठन विस्तार और बूथ कमेटियों को मजबूत करने का जरिया बना लिया है। इसके तहत भाजपा के दिग्गज नेता और कार्यकर्ता अब हर घर तक अपनी सीधी पैठ बना रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस अहम गढ़ में नेताओं की आमद बढ़ गई है, जमीनी कार्यकर्ताओं को रीचार्ज किया जा रहा है और जनता की नब्ज टटोलने के लिए हर स्तर से चुनावी फीडबैक जुटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो मेरठ के संगठन को लगातार चुनावी मोड में रखने के लिए अन्य जिलों और प्रदेश स्तर के रसूखदार नेताओं के दौरों का सिलसिला बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही, जिले के नवनियुक्त प्रभारी मंत्री असीम अरुण को भी संगठन ने दो टूक निर्देश दिए हैं कि वे क्षेत्र में अपनी विजिबिलिटी और दौरों की संख्या में इजाफा करें। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का स्पष्ट मानना है कि चुनावी शंखनाद से पहले जमीनी ढांचा जितना ज्यादा चुस्त-दुरुस्त रहेगा, मतदान के दिन पोलिंग बूथों पर उसका उतना ही बंपर लाभ देखने को मिलेगा।
पार्टी द्वारा 5 जून से 21 जून तक एक विशेष महा-जनसंपर्क अभियान संचालित किया जा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस से शुरू हुआ यह व्यापक जन-अभियान आगामी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस तक निरंतर जारी रहेगा। इस मुहिम के तहत पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता और पदाधिकारी सुदूर गांवों से लेकर शहरी वार्डों के घर-घर जाकर केंद्र सरकार की प्रमुख उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और ऐतिहासिक फैसलों का ब्योरा जनता के सामने रख रहे हैं।
नेताओं के साथ टिकट के संभावित दावेदारों ने भी झोंकी ताकत
इस महा-अभियान के अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले समाज के प्रबुद्ध और प्रभावशाली मतदाताओं (ओपिनियन मेकर्स) से व्यक्तिगत रूप से संपर्क साधा जा रहा है और सरकार के कामकाज को लेकर उनका फीडबैक रजिस्टर किया जा रहा है। मेरठ में चल रही इस सांगठनिक कवायद में स्थानीय सांसद अरुण गोविल, प्रभारी मंत्री असीम अरुण, एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज, सुनील भराला और कैंट क्षेत्र के विधायक अमित अग्रवाल लगातार पसीना बहा रहे हैं। बड़ी बात यह है कि पार्टी के वर्तमान जनप्रतिनिधियों के कंधों से कंधा मिलाकर, आने वाले चुनाव में टिकट की चाह रखने वाले संभावित दावेदार भी अपनी जमीन मजबूत करने के लिए इस जनसंपर्क अभियान में पूरी ताकत से जुट गए हैं।
'बूथ जीता, चुनाव जीता' की रणनीति पर फोकस
भाजपा की इस पूरी चुनावी बिसात का सबसे अहम और रणनीतिक हिस्सा 'बूथ स्तर' पर किलेबंदी को अभेद्य बनाना है। इसके लिए मंडल और जिला स्तर के पदाधिकारी लगातार पन्ना प्रमुखों और बूथ अध्यक्षों के साथ मैराथन बैठकें कर रहे हैं और धरातल से आ रहे व्यावहारिक सुझावों पर अमल कर रहे हैं। इसके अलावा, आधी आबादी (महिला विंग) और युवा मतदाताओं को नए सदस्य के रूप में संगठन से जोड़ने के लिए विशेष विंग को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही कार्यकर्ताओं का एक अभेद्य और अजेय नेटवर्क तैयार हो सके।
आगामी एमएलसी चुनावों को लेकर भी कड़े निर्देश
साल 2027 के सेमीफाइनल के रूप में देखे जा रहे इसी वर्ष होने वाले स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव भी भाजपा की शीर्ष प्राथमिकताओं में ऊपर चल रहे हैं। पार्टी ने इस बार भी मेरठ-सहारनपुर शिक्षक सीट से अपने वर्तमान एमएलसी श्रीचंद शर्मा पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा चुनावी समर में उतारा है। इन चुनावों की तैयारियों को धार देने के लिए नियुक्त किए गए प्रभारी लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। इस क्रम में मेरठ महानगर के प्रभारी व प्रदेश मंत्री विजय शिवहरे और मेरठ जिला प्रभारी मान सिंह गोस्वामी लगातार सांगठनिक बैठकों और दौरों के माध्यम से पार्टी की चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं।


