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    वीसी शशि प्रताप शाही हटाए, मगध विश्वविद्यालय में नया प्रभारी बने दिलीप केसरी

    पटना: बिहार के मगध विश्वविद्यालय में 150 से 200 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले, अवैध फंड निकासी और नियमों को ताक पर रखकर की गई नियुक्तियों के आरोपों के बाद राजभवन ने बड़ा प्रशासनिक चाबुक चलाया है। राज्यपाल ने कड़ा फैसला लेते हुए तत्कालीन प्रभारी कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही को उनके पद से बेदखल कर दिया है। उनकी जगह पर यूनिवर्सिटी के सबसे सीनियर प्रोफेसर दिलीप केसरी को नया प्रभारी वाइस चांसलर (कुलपति) नियुक्त किया गया है।

    पूर्व सांसद ने पीएम मोदी को लिखी थी चिट्ठी, लगाया था करोड़ों की हेरफेर का आरोप

    प्रशासनिक गलियारों में यह बड़ी हलचल तब शुरू हुई जब औरंगाबाद के पूर्व सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार सिंह ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय में चल रहे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया था। 15 मई 2026 को भेजे गए इस शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया था कि सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद भी पद पर जमे रहे प्रो. शाही ने यूनिवर्सिटी के खजाने से करीब 150 से 200 करोड़ रुपये की अवैध निकासी को अंजाम दिया। पत्र में कुछ प्रभावशाली चेहरों की मिलीभगत की आशंका जताते हुए इसकी कॉपियां पीएमओ, निगरानी विभाग और राज्यपाल सचिवालय को भी भेजी गई थीं।

    हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर, राजभवन ने अधिकारों पर लगाई कैंची

    यह पूरा विवाद अब कानूनी चौखट पर भी पहुंच चुका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (CWJC No-5762/2026) दाखिल की गई है, जिसमें कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हलफनामे के साथ गड़बड़ियों के सबूत सौंपे हैं। चौतरफा घिरने के बाद राजभवन ने प्रो. शाही को हटाने का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन साथ ही नए प्रभारी कुलपति प्रो. दिलीप केसरी के पर भी कतर दिए हैं। आदेश के मुताबिक, नए कुलपति बिना राजभवन की पूर्व अनुमति के कोई भी बड़ा नीतिगत या संवैधानिक फैसला नहीं ले सकेंगे।

    सियासी और शैक्षणिक गलियारों में भूचाल, उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज

    मगध यूनिवर्सिटी के इस तख्तापलट ने बिहार के राजनीतिक और शैक्षणिक माहौल में गरमाहट पैदा कर दी है। विभिन्न छात्र संगठनों, शिक्षक संघों और विपक्षी दलों ने इस महाघोटाले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग तेज कर दी है। हालांकि, अब तक पद से हटाए गए प्रो. शशि प्रताप शाही या निवर्तमान विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से इन गंभीर आरोपों पर कोई आधिकारिक सफाई या बयान सामने नहीं आया है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में जांच एजेंसियां इस मामले में क्या रुख अपनाती हैं।

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