भीषण गर्मी के मौसम में तैलीय त्वचा (ऑयली स्किन) की समस्या काफी बढ़ जाती है, जिससे चेहरा लगातार चिपचिपा, सुस्त और बेजान नजर आने लगता है। सौंदर्य और त्वचा रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, एक सेहतमंद त्वचा के लिए चेहरे पर आने वाले इस अतिरिक्त सीबम या तेल को नियंत्रित करना बेहद आवश्यक है। जब त्वचा से बहुत ज्यादा तेल निकलता है, तो वह रोमछिद्रों (पोर्स) को पूरी तरह बंद कर देता है, जिससे न केवल चेहरे का आकर्षण कम होता है बल्कि पिंपल्स, ब्लैकहेड्स और गंभीर एक्ने (मुंहासे) जैसी समस्याएं तेजी से पनपने लगती हैं। यदि इस अतिरिक्त तेल के उत्पादन पर काबू पा लिया जाए, तो त्वचा एकदम साफ, खिली-खिली और स्वस्थ बनी रहती है, साथ ही विभिन्न प्रकार के स्किन इन्फेक्शन्स का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।
चेहरे का धुंधलापन और ऑयली स्किन से निपटने के लिए सही दिनचर्या
गर्मियों के दिनों में वायुमंडल में उमस और आर्द्रता बढ़ने के कारण त्वचा से निकलने वाला अतिरिक्त तेल पोर्स में समा जाता है। पसीने और धूल के इस मिश्रण से चेहरा हमेशा बुझा-बुझा और डल दिखता है, जो आपके महंगे मेकअप को भी कुछ ही मिनटों में खराब कर देता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए दिन में कम से कम दो बार सैलिसिलिक एसिड वाले हल्के फेस वॉश का इस्तेमाल करें, लेकिन ध्यान रहे कि चेहरे को बार-बार धोने की गलती न करें, क्योंकि अत्यधिक ड्राई होने पर त्वचा रक्षात्मक रूप से और ज्यादा तेल बनाने लगती है। तैलीय त्वचा को संतुलित रखने के लिए हमेशा लाइटवेट, ऑयल-फ्री और जेल-बेस्ड मॉइस्चराइजर का चुनाव करें। इसके साथ ही, धूप में निकलने से पहले मैट-फिनिश सनस्क्रीन लगाना न भूलें और हफ्ते में एक या दो बार मुल्तानी मिट्टी में गुलाब जल मिलाकर तैयार किया गया फेस पैक लगाएं, जबकि खीरे का रस और एलोवेरा जेल जैसे प्राकृतिक उपाय त्वचा को भीतर से ठंडक व ताजगी देते हैं।
संतुलित खान-पान, भरपूर जल सेवन और अंदरूनी सेहत का असर
हमारी त्वचा की बाहरी चमक का सीधा संबंध हमारे खान-पान और आंतरिक स्वास्थ्य से होता है। गर्मी के महीनों में दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर पूरी तरह हाइड्रेटेड रहता है, जिससे सीबम ग्रंथियां शांत रहती हैं और त्वचा पर अतिरिक्त तेल का बनना खुद-ब-खुद धीमा हो जाता है। शरीर से हानिकारक और विषैले तत्वों को बाहर निकालने के लिए नारियल पानी और नींबू पानी का सेवन एक बेहतरीन जरिया है। अपनी दैनिक डाइट में पानी से भरपूर फलों जैसे तरबूज, खरबूजा और खीरे के साथ-साथ हरी पत्तेदार सब्जियों व सूखे मेवों को तरजीह दें। इसके विपरीत, अत्यधिक मसालेदार, तला-भुना भोजन, रिफाइंड शुगर से बनी मीठी चीजें और जंक फूड से पूरी तरह दूरी बना लें, क्योंकि ये खाद्य पदार्थ त्वचा के ऑयल ग्लैंड्स को उत्तेजित कर मुंहासों को बढ़ावा देते हैं।
त्वचा रोग विशेषज्ञों की कड़े परामर्श और विशेष सावधानियां
डर्मेटोलॉजिस्ट्स के अनुसार, कड़क धूप और हाई ह्यूमिडिटी के कारण गर्मियों में त्वचा से जुड़ी बीमारियां अपने चरम पर होती हैं। विशेष रूप से थायरॉइड और मधुमेह (डायबिटीज) जैसी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की त्वचा अक्सर शुष्क हो जाती है, इसलिए उन्हें ऐसे नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइश्चराइजर का उपयोग करना चाहिए जो त्वचा के छिद्रों को बंद न करें। किशोरों और युवाओं को सलाह दी जाती है कि वे ऑयल-बेस्ड ब्यूटी प्रोडक्ट्स और कॉस्मेटिक्स की जगह पूरी तरह जेल-बेस्ड और सन प्रोटेक्शन फॉर्मूला वाले विकल्पों को ही अपनी किट में शामिल करें। चूंकि इस मौसम में सन टैनिंग, स्किन एलर्जी, धूप से होने वाली जलन और एक्ने का खतरा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए विटामिन-सी से भरपूर खट्टे फलों व सब्जियों का प्रचुर सेवन करें और बिना डॉक्टर की सलाह के चेहरे पर किसी भी तरह के भारी क्रीम्स का लेप लगाने से बचें।


