More
    Homeराज्यमध्यप्रदेशनिजी स्कूलों को चेतावनी, फीस पोर्टल पर जानकारी नहीं देने वालों पर...

    निजी स्कूलों को चेतावनी, फीस पोर्टल पर जानकारी नहीं देने वालों पर होगी कार्रवाई

    जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने वाले प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ अब कड़ा एक्शन लिया जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जारी नियम के मुताबिक, सभी निजी स्कूलों को 30 अप्रैल तक अपनी फीस का पूरा ब्योरा सरकारी पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करना था। स्कूलों को राहत देते हुए इस अंतिम तारीख को बढ़ाकर 20 मई भी किया गया था। इसके बावजूद, जिले के कुल 1020 स्कूलों में से 330 से ज्यादा निजी स्कूलों ने अभी तक अपनी फीस संरचना सार्वजनिक नहीं की है। अब इन सभी डिफाल्टर स्कूलों से सामान्य फीस के मुकाबले 5 गुना अधिक विलंब शुल्क (लेट फाइन) वसूला जाएगा।

    लापरवाही में प्राइमरी और मिडिल स्कूल सबसे आगे

    शिक्षा विभाग के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि सरकारी पोर्टल पर जानकारी न देने वालों में प्राथमिक (प्राइमरी) और माध्यमिक (मिडिल) स्तर के स्कूलों की तादाद सबसे ज्यादा है। इनके साथ ही 4 हाई स्कूल और 5 हायर सेकेंडरी स्कूल भी तय समय में अपनी फीस की जानकारी देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। 30 प्रतिशत से अधिक स्कूलों की इस घोर लापरवाही से न केवल उनकी कार्यशैली पर उंगलियां उठ रही हैं, बल्कि शिक्षा विभाग के खुद के मॉनिटरिंग सिस्टम की मुस्तैदी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    छात्रों की संख्या के आधार पर ऐसे तय होगा भारी जुर्माना

    डिफाल्टर स्कूलों पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर तय की गई है, जो सीधे उनके बजट पर असर डालेगी:

    छात्रों की संख्यासामान्य शुल्क5 गुना बढ़ा हुआ विलंब शुल्क
    2000 से अधिक छात्र5,000 रुपये25,000 रुपये
    1001 से 2000 छात्र3,000 रुपये15,000 रुपये
    501 से 1000 छात्र2,000 रुपये10,000 रुपये
    500 तक छात्र (छोटे स्कूल)1,000 रुपये5,000 रुपये

    कम फीस वाले स्कूलों को रियायत, तकनीकी खराबी का भी हवाला

    इस पूरे मामले पर निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि वे जानबूझकर देरी नहीं कर रहे थे, बल्कि शिक्षा विभाग के फीस पोर्टल में लंबे समय से तकनीकी गड़बड़ी (तकनीकी खामियां) चल रही थी। इसकी लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में भी की गई थी, लेकिन समस्या का समाधान समय पर नहीं हुआ।

    दूसरी तरफ, शिक्षा विभाग ने उन स्कूलों को बड़ी राहत दी है जिनकी सालाना फीस 25,000 रुपये से कम है। ऐसे स्कूलों को पोर्टल पर केवल एक शपथ-पत्र (अफेडेविट) जमा करना था। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि कम फीस वाले कई छोटे स्कूलों ने अब तक यह आसान प्रक्रिया भी पूरी नहीं की है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here