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    पानी की परेशानी हुई दूर, जल जीवन मिशन से बदली ग्रामीणों की तस्वीर

    मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर: छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र भरतपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत दूधांसी के आश्रित गांव लरघाडंडी में 'जल जीवन मिशन' योजना ग्रामीणों के लिए एक बड़ा वरदान साबित हुई है। एक दौर में भीषण जल संकट का सामना करने वाला यह आदिवासी बहुल इलाका आज नियमित पेयजल आपूर्ति, पानी की बचत और जनभागीदारी की एक बेहतरीन मिसाल बनकर सामने आया है।

    हैंडपंप और नदियों के भरोसे कटती थी जिंदगी

    एक समय ऐसा था जब लरघाडंडी के निवासियों को पीने के पानी के लिए हैंडपंपों, कुओं या फिर नजदीकी नदी-नालों पर निर्भर रहना पड़ता था। विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को चिलचिलाती धूप में कई किलोमीटर का सफर पैदल तय करके पानी का इंतजाम करना पड़ता था, जिससे उनका काफी समय और मेहनत बर्बाद होती थी। लेकिन 'जल जीवन मिशन' के धरातल पर उतरने के बाद से यहाँ की पूरी तस्वीर ही बदल गई है।

    10 हजार लीटर की टंकी से मिल रहा साफ पानी

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की सक्रियता से गांव में एक नया जल स्रोत विकसित किया गया है। इसके साथ ही:

    • गांव में 10,000 लीटर की भारी क्षमता वाली पानी की टंकी का निर्माण किया गया है।

    • आधुनिक मोटर पंप और सुव्यवस्थित पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया गया है।

    इस नई व्यवस्था के शुरू होने से अब गांव के प्रत्येक घर में सीधे नल से शुद्ध और साफ पानी पहुंच रहा है, जिससे गृहणियों को एक बहुत बड़ी राहत मिली है।

    ग्रामीण विकास का एक अनोखा मॉडल

    इस पूरी योजना को सफल बनाने में 'ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति' के पदाधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। पानी की उपलब्धता के साथ-साथ अब गांव के लोगों में जल संरक्षण, पर्यावरण और साफ-सफाई को लेकर चेतना आई है। सभी ग्रामीण मिलकर पानी के स्रोतों को बचाने के लिए सामूहिक रूप से श्रमदान भी कर रहे हैं।

    आज यह छोटा सा गांव सिर्फ पानी की सुविधा से ही संपन्न नहीं हुआ है, बल्कि बेहतर वॉटर मैनेजमेंट और आपसी सहयोग के दम पर पूरे चिरमिरी और मनेंद्रगढ़ क्षेत्र के लिए ग्रामीण विकास की एक नई प्रेरणा बन गया है। यह सफलता दर्शाती है कि अगर सरकारी योजनाओं को ईमानदारी से लागू किया जाए और जनता का साथ मिले, तो सुदूर गांवों की तकदीर भी बदली जा सकती है।

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