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    आंदोलन का नया मंच बनी पानी की टंकी, प्रशासन को करनी पड़ी मशक्कत

    दौसा राजस्थान के दौसा जिले में स्थानीय प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखने और उन पर दबाव बनाने के लिए पानी की टंकियों पर चढ़ने का एक अनोखा और खतरनाक चलन बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जिले के दो अलग-अलग कस्बों में कई घंटों तक भारी हंगामा और हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। ग्रामीणों के इस उग्र विरोध प्रदर्शन के चलते स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति पर काबू पाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

    पानी के संकट और भारी-भरकम डिमांड राशि पर फूटा गुस्सा

    पहला मामला मंडावर नगर पालिका क्षेत्र के सायपुर-पाखर गांव का है, जहां पीने के पानी की किल्लत और नए नल कनेक्शन के लिए मांगी जा रही 9200 रुपये की डिमांड राशि के खिलाफ शुक्रवार सुबह ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित ग्रामीण जलदाय विभाग की पानी की टंकी पर जा चढ़े और सरकार व विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि बिना ऑनलाइन आवेदन और इतनी बड़ी राशि जमा कराए उन्हें तुरंत पानी के कनेक्शन दिए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी पाइपलाइन से लंबे समय से जलापूर्ति बंद है, जिससे इंसानों के साथ-साथ मवेशियों के लिए भी पानी का संकट खड़ा हो गया है और उन्हें महंगे दामों पर निजी टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। मौके पर पहुंचे जलदाय विभाग के सहायक अभियंता और नायब तहसीलदार ने ग्रामीणों को समझाकर पांच दिन के भीतर पुरानी बोरिंग से लाइन जोड़कर वैकल्पिक जलापूर्ति शुरू करने का लिखित भरोसा दिया, जिसके बाद ग्रामीण नीचे उतरे।

    अवैध खनन और ब्लास्टिंग के खिलाफ टंकी पर हाई-वोल्टेज ड्रामा

    दूसरा बड़ा हंगामा सीकरी कस्बे में सुबह करीब 8 बजे शुरू हुआ, जहां पहाड़ों में चल रहे क्रेशर प्लांटों में होने वाली अवैध ब्लास्टिंग, अनियंत्रित खनन, चरागाह भूमि पर अतिक्रमण और रास्तों पर धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव न होने से नाराज तीन युवक पानी की टंकी पर चढ़ गए। टंकी के नीचे मौजूद महिलाओं और अन्य ग्रामीणों ने खनिज विभाग व प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप था कि आबादी क्षेत्र के पास दिन-रात होने वाले धमाकों से उनका जीना मुहाल हो गया है और उड़ती धूल के कारण लोग सिलिकोसिस जैसी जानलेवा बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इसके साथ ही महिलाओं ने इलाके में अवैध रूप से संचालित शराब के ठिकानों को भी बंद करने की पुरजोर मांग उठाई।

    सुरक्षा जाल और एसडीएम की सख्ती के बाद शांत हुआ मामला

    घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए मानपुर और बालाजी पुलिस थानों की टीमें सिविल डिफेंस के जवानों के साथ मौके पर पहुंचीं और सुरक्षा के तौर पर टंकी के नीचे बड़ा जाल बिछाया गया। सुबह करीब 10 बजे एसडीएम डॉ. नवनीत कुमार ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। उन्होंने क्रेशर संचालकों को सख्त हिदायत देते हुए सुबह और शाम के व्यस्त समय (6 से 9 बजे) में खनन व ब्लास्टिंग के काम पर पूरी तरह रोक लगाने और रास्तों पर नियमित पानी छिड़कने के आदेश दिए। साथ ही अतिक्रमण हटाने और शराबियों पर पुलिस गश्त बढ़ाने के आश्वासन के बाद सुबह 11 बजे युवक नीचे उतरने को राजी हुए। हालांकि, नीचे उतरने के बाद पुलिस ने तीनों युवकों का मेडिकल परीक्षण कराया और शांति भंग करने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

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