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    ‘संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करेंगे’: अभिषेक बनर्जी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर जताया भरोसा

    कोलकाता | पश्चिम बंगाल की सत्ता के शिखर पर शनिवार को बड़ा परिवर्तन देखने को मिला, जब भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। इस जीत के साथ ही भाजपा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लंबे शासन का अंत कर दिया है। विशेष रूप से, शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से ममता बनर्जी को पराजित कर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इस सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    खबर के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

    1. चुनावी निष्पक्षता और संस्थाओं पर प्रहार

    अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपनी भड़ास निकालते हुए चुनाव आयोग और सरकारी एजेंसियों की भूमिका को पक्षपातपूर्ण करार दिया। उन्होंने दावा किया कि लगभग 30 लाख वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से जानबूझकर हटाए गए। बनर्जी ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाएं, जिन्हें निष्पक्ष रहना चाहिए था, वे एकतरफा काम करती दिखीं। उनके अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया ने राज्य में लोकतंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

    2. ईवीएम और वोटों की गिनती में गड़बड़ी का आरोप

    टीएमसी नेता ने मतगणना के दौरान हुई प्रक्रियाओं को 'परेशान करने वाला' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंट्रोल यूनिट के मिलान न होने और ईवीएम के रख-रखाव में भारी अनियमितताएं देखी गईं। अभिषेक बनर्जी ने मांग की है कि मतगणना केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएं और वीवीपैट पर्चियों की पारदर्शी तरीके से दोबारा गिनती हो। उन्होंने कहा कि लाखों लोग अब यह पूछ रहे हैं कि क्या घोषित परिणाम वास्तव में जनता का असली जनादेश है या इसमें कोई हेरफेर की गई है।

    3. कार्यकर्ताओं पर हमले और विपक्ष की भूमिका

    अभिषेक बनर्जी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा पर गहरी चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को डराया-धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यालयों पर हमले किए जा रहे हैं और जमीनी कार्यकर्ताओं को घर छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है। हालांकि, हार के बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया कि टीएमसी घुटने नहीं टेकेगी। उन्होंने संकल्प लिया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में उनकी पार्टी दिल्ली से लेकर बंगाल तक एक मजबूत और मुखर विपक्ष की भूमिका निभाएगी और जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

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