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    कुंडली में क्या होता है नाड़ी दोष, कैसे वैवाहिक जीवन पारित डालता है नकारात्मक असर?

    शादी की बात चलती है तो घर में उत्साह के साथ एक और चीज चुपचाप शुरू हो जाती है-कुंडली मिलान. “गुण कितने मिले?” ये सवाल आज भी उतना ही आम है जितना पहले था. खासकर अरेंज मैरिज में तो ये कदम लगभग पक्का माना जाता है. कई बार सब ठीक चलता दिखता है, लेकिन अचानक एक शब्द माहौल बदल देता है-नाड़ी दोष. परिवार में चिंता, सलाह, पंडित जी से दूसरी राय… सब शुरू. पर असल में नाड़ी दोष है क्या, क्यों इसे इतना गंभीर माना जाता है और क्या हर केस में डरने की जरूरत होती है? आम लोगों के मन में यही उल्कझन रहती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

    कुंडली मिलान में नाड़ी का मतलब क्या है?
    ज्योतिष के मुताबिक शादी से पहले लड़का और लड़की की जन्म जानकारी के आधार पर 36 गुण मिलाए जाते हैं. इनमें से नाड़ी को काफी अहम माना गया है. नाड़ी असल में जन्म नक्षत्र से जुड़ी एक श्रेणी है, जो तीन तरह की होती है-आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत नाड़ी, अगर वर-वधु दोनों की नाड़ी एक ही निकलती है, तो इसे नाड़ी दोष कहा जाता है. मान्यता है कि ऐसा मेल वैवाहिक जीवन में परेशानी ला सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से देखा जाता है.

    नाड़ी दोष को अशुभ क्यों कहा जाता है?
    पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नाड़ी दोष होने पर शादी के बाद दंपति को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि इससे सेहत, संतान सुख और आपसी तालमेल प्रभावित हो सकता है. कुछ लोग इसे आर्थिक दिक्कतों और रिश्ते में खटास से भी जोड़ते हैं.
    हालांकि आजकल कई ज्योतिषी ये भी मानते हैं कि सिर्फ एक दोष देखकर पूरा रिश्ता खारिज करना सही नहीं. कुंडली में और भी कई योग और संतुलन देखने होते हैं. कई सफल शादियां ऐसी भी हैं जहां नाड़ी दोष था, लेकिन जीवन सामान्य रहा.

    कब नाड़ी दोष नहीं माना जाता?
    ये बात कम लोग जानते हैं कि हर समान नाड़ी वाला मेल दोष नहीं बनाता. ज्योतिष शास्त्र में कुछ स्थितियां ऐसी बताई गई हैं जहां राहत मानी जाती है:
    अलग चरण, एक ही नक्षत्र
    अगर दोनों एक ही नक्षत्र में जन्मे हों, लेकिन उनके चरण अलग हों, तो दोष का असर कम या खत्म माना जाता है.

    एक राशि, अलग नक्षत्र
    कुछ मान्यताओं के अनुसार अगर जन्म राशि समान हो, लेकिन नक्षत्र अलग हों, तो भी स्थिति हल्की मानी जाती है. इसीलिए सिर्फ “नाड़ी दोष है” सुनकर घबराने के बजाय पूरी कुंडली का संतुलन देखना जरूरी होता है.
    लोगों के अनुभव क्या कहते हैं?
    दिल्ली की नेहा (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि उनकी शादी से पहले भी नाड़ी दोष बताया गया था. परिवार चिंतित था, लेकिन एक अनुभवी ज्योतिषी ने बाकी ग्रह स्थिति देखकर कहा कि डरने की बात नहीं. आज उनकी शादी को आठ साल हो चुके हैं और सब सामान्य है. दूसरी तरफ कुछ परिवार इसे पूरी तरह मानते हैं और उपाय कराके ही आगे बढ़ते हैं. यानी फैसले अक्सर विश्वास, परंपरा और सलाह के मिश्रण से होते हैं.
    नाड़ी दोष के लिए क्या उपाय बताए जाते हैं?
    पारंपरिक उपायों में मंत्र जाप, दान और विशेष पूजा शामिल हैं.
    1. मंत्र और पूजा
    महामृत्युंजय मंत्र का जाप काफी लोगों द्वारा किया जाता है.
    2. दान
    अनाज, वस्त्र, गाय सेवा या भोजन दान जैसी बातें भी कही जाती हैं.
    मान्यता है कि ये उपाय मन को शांति देते हैं और नकारात्मक असर कम करने में मददगार होते हैं.
    आखिर कितना डरना सही?
    आज की पीढ़ी ज्योतिष को आस्था के रूप में देखती है, लेकिन साथ ही समझदारी भी रखती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि कुंडली मिलान एक मार्गदर्शन हो सकता है, अंतिम सच नहीं. रिश्ते भरोसे, समझ और बातचीत से चलते हैं.
    इसलिए नाड़ी दोष को जानना जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है संतुलित नजरिया.

     

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