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    MSCI इंडेक्स में भारतीय कंपनियां क्यों पिछड़ीं? 26 साल बाद दिखा बड़ा बदलाव

    मुंबई। वैश्विक शेयर बाजारों में आए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के अभूतपूर्व उछाल ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित 'एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स' का पूरा परिदृश्य ही बदल कर रख दिया है। इस बड़े बदलाव के कारण सूचकांक के शीर्ष-10 और शीर्ष-100 सबसे मूल्यवान शेयरों की सूची से सभी भारतीय कंपनियां बाहर हो गई हैं। वर्तमान में 100 अरब डॉलर से अधिक के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) वाले विशिष्ट क्लब में भारत की केवल तीन कंपनियां (रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल) ही अपनी जगह बचा पाई हैं, जिनकी तादाद पहले छह हुआ करती थी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की वजह भारत की कोई आर्थिक कमजोरी नहीं है, बल्कि दुनिया भर में चली एआई की तीव्र लहर है, जिसका असर अब भारतीय शेयर बाजार पर दिखने लगा है।

    वैश्विक निवेशकों के लिए बेंचमार्क है एमएससीआई इंडेक्स

    यह सूचकांक दुनिया भर के बड़े विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लिए एक मार्गदर्शक की तरह काम करता है। वैश्विक स्तर पर करीब 700 अरब डॉलर का पैसिव फंड सीधे तौर पर इस इंडेक्स की गतिविधियों पर नजर रखता है और इसी के भारांश (वेटेज) के आधार पर विभिन्न विकासशील देशों के बाजारों में पूंजी का निवेश करता है। सरल शब्दों में, जब इस सूचकांक में किसी देश का प्रतिनिधित्व बढ़ता है, तो विदेशी निवेश खुद-ब-खुद उस देश के बाजारों की ओर आकर्षित होता है, और वेटेज घटने पर विदेशी निवेशक अपनी पूंजी वापस निकालने लगते हैं। मौजूदा दौर में इस इंडेक्स के भीतर भारत की पकड़ और स्थिति लगातार कमजोर होती दिख रही है।

    रैंकिंग और वेटेज में भारी गिरावट का दौर

    कुछ समय पहले यानी मार्च तक इस सूचकांक के शीर्ष-10 दिग्गजों में भारत के दो बड़े कॉर्पोरेट घराने एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज क्रमशः सातवें और आठवें पायदान पर मजबूती से जमे हुए थे। मगर हालिया आंकड़ों के अनुसार, एचडीएफसी बैंक फिसलकर 11वें और रिलायंस इंडस्ट्रीज 12वें स्थान पर आ गई है। इस बदलाव से न केवल भारतीय कंपनियों की रैंकिंग पर असर पड़ा है, बल्कि एमएससीआई इंडेक्स में भारत का कुल वेटेज भी गिरकर पिछले छह वर्षों के न्यूनतम स्तर यानी 10.87 प्रतिशत पर आ गया है, जो साल 2024 के अपने उच्चतम रिकॉर्ड स्तर से लगभग आधा रह गया है।

    एआई और सेमीकंडक्टर की रेस में ताइवान और दक्षिण कोरिया आगे

    बाजार में आए इस बड़े उलटफेर के पीछे वैश्विक निवेशकों की एआई और सेमीकंडक्टर (चिप निर्माता) कंपनियों के प्रति बढ़ती दीवानगी है। ताइवान की टीएसएमसी, दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी तकनीकी कंपनियों के शेयरों में 48 से लेकर 194 प्रतिशत तक की भारी तेजी दर्ज की गई है। चूंकि सेमीकंडक्टर का मुख्य ढांचा ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन में केंद्रित है, इसलिए इन देशों की कंपनियों के मूल्यांकन में भारी उछाल आया और उन्होंने भारतीय दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया। इसके विपरीत, भारतीय आईटी कंपनियां पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं तक ही सीमित रहीं, जिसके कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय आईटी शेयरों में लगी अपनी 81 अरब डॉलर की पूंजी को घटाकर महज 40 अरब डॉलर कर दिया है। परिणामस्वरूप, इस इंडेक्स के लगभग 70 फीसदी हिस्से पर अब ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन का पूर्ण नियंत्रण हो गया है।

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