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    Homeधर्म-समाजमां कामाख्या ने अपने प्रिय पुजारी को क्यों बना दिया पत्थर?

    मां कामाख्या ने अपने प्रिय पुजारी को क्यों बना दिया पत्थर?

    मां कामाख्या मंदिर की गिनती भारत के सबसे प्राचीन और शक्तिशाली मंदिरों में होती है. यह मंदिर असम के गुवाहाटी में स्थित है और यहां देवी शक्ति के तंत्र स्वरूप की पूजा होती है. माना जाता है कि यहां देवी मां सीधे अपने भक्तों को आशीर्वाद देने आती हैं. इस मंदिर से जुड़ी कई रहस्यमयी कहानियां प्रचलित हैं जिनमें से एक सबसे अनोखी कहानी है मां कामाख्या और उनके भक्त पुजारी केंद्रकलाई की. कहा जाता है कि मां कामाख्या ने खुद अपने प्रिय पुजारी को मार डाला था. आखिर क्यों मां को ऐसा करना पड़ा? इस घटना के पीछे की कहानी जानकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे.

    मां कामाख्या मंदिर का इतिहास
    करीब 600 साल पहले की बात है जब मां कामाख्या मंदिर के गर्भगृह में पूजा करने का जिम्मा केंद्रकलाई नाम के पुजारी के पास था. वह मां के सच्चे भक्त थे और हर शाम गर्भगृह का दरवाजा बंद करके आंखें मूंदकर मां की आरती करते थे. कहा जाता है कि इसी समय मां कामाख्या वहां स्वयं प्रकट होकर नृत्य करती थीं. केंद्रकलाई ने कभी अपनी आंखें नहीं खोलीं, लेकिन मां के पायल की मधुर आवाज सुनते रहते थे.

    राजा नर नारायण की इच्छा
    उस समय कोच वंश के राजा नर नारायण को जब यह बात पता चली कि मां स्वयं प्रकट होकर नृत्य करती हैं, तो उन्होंने भी यह नजारा देखने की इच्छा जताई. केंद्रकलाई ने राजा को समझाने की कोशिश की कि ऐसा करना सही नहीं होगा, लेकिन राजा के दबाव में उन्हें मानना पड़ा. अगले दिन आरती के समय राजा ने मंदिर की दीवार में बने एक छोटे से छेद से मां को देखने की कोशिश की.
    मां का श्राप और राजा की सजा
    जैसे ही राजा की नजर मां पर पड़ी, उनकी आंखों की रोशनी चली गई. मां कामाख्या को सब समझ में आ गया कि उनका नृत्य किसी ने देख लिया है. वह बहुत क्रोधित हो गईं और उन्होंने तुरंत श्राप दिया कि अब से अगर कोच वंश का कोई भी व्यक्ति मंदिर में प्रवेश करेगा, तो या तो वह अंधा हो जाएगा या उसकी मृत्यु हो जाएगी. आज भी कोच वंश से जुड़े लोग मां कामाख्या मंदिर में प्रवेश नहीं करते.

    केंद्रकलाई का अंत
    राजा की इस हरकत से मां कामाख्या बेहद दुखी और क्रोधित थीं. उन्हें यह भी महसूस हुआ कि केंद्रकलाई ने राजा को रोकने में कमजोरी दिखाई. मां ने अपने प्रिय पुजारी को पत्थर का बना दिया. कहा जाता है कि आज भी गर्भगृह के पास केंद्रकलाई का पत्थर का रूप मौजूद है. यह घटना भक्तों को यह संदेश देती है कि मां के नियमों का पालन करना कितना जरूरी है.

    आज का मंदिर और आस्था
    आज भी मां कामाख्या मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. लोग मानते हैं कि यहां मां शक्ति का वास है और सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती. मंदिर का माहौल रहस्यमयी होने के साथ-साथ बेहद शक्तिशाली भी है. मां कामाख्या की यह कथा हमें यह भी सिखाती है कि भक्ति में अनुशासन और विश्वास कितना महत्वपूर्ण होता है.

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