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    13 साल के वैभव पर 10 करोड़ लगाने को क्यों तैयार था राजस्थान रॉयल्स? अब सामने आई पूरी कहानी

    आईपीएल में जब राजस्थान रॉयल्स ने एक 13 साल के लड़के पर करोड़ों रुपये दांव लगाने की बात सोची, तो यह फैसला किसी जुए से कम नहीं था, लेकिन आज वही लड़का, 15 साल का वैभव सूर्यवंशी, भारतीय क्रिकेट की सबसे रोमांचक कहानियों में से एक बन चुका है। यह कहानी सिर्फ छक्कों और शतकों की नहीं, बल्कि उस जुनून की है जो गांव की मिट्टी से उठकर दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुंचता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वैभव के लिए राजस्थान ने 10 करोड़ रुपये तक रख रखे थे। फ्रेंचाइजी तब 13 साल के रहे वैभव पर पैसे लुटाने को तैयार थी। अब सवाल उठ रहा होगा क्यों? तो इसके पीछे ट्रायल्स की एक दिलचस्प कहानी है, जिसका खुलासा राजस्थान टीम के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर और टैलेंट स्काउट का हिस्सा जुबीन भरूचा ने अब क्रिकेट मंथली से किया है। आइए वो कहानी जानते हैं…

    '10 करोड़ रखो': एक भरोसा जिसने सब बदल दिया

    नवंबर 2024 में सऊदी अरब में आईपीएल मेगा ऑक्शन की तैयारियां चल रही थीं और सभी फ्रेंचाइजी अपनी शॉर्टलिस्ट पर चर्चा कर रही थी। मेगा ऑक्शन से पहले, राजस्थान टीम के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर जुबीन भरूचा ने टीम से कहा था, '10 करोड़ अलग रखो।' कमरे में सन्नाटा था। सवाल था- किसके लिए? जुबिन भरूचा जिस नाम की सिफारिश कर रहे थे, वह न कोई बड़ा इंटरनेशनल स्टार था और न ही घरेलू क्रिकेट में खुद को साबित कर चुका खिलाड़ी, बल्कि बिहार के एक अनजान से गांव का 13 साल का लड़का था, जहां ढंग की क्रिकेट सुविधाएं भी मौजूद नहीं थीं। टीम मैनेजमेंट की पहली प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी- हैरानी और अविश्वास। उन्होंने लगभग मजाकिया अंदाज में कहा- तुम पागल हो क्या? पहले तो यह राजस्थान टीम मैनेजमेंट को यह मजाक लगा, लेकिन जब भरूचा ने ट्रायल का अनुभव सुनाया, तो कहानी बदल गई।

    महाराष्ट्र के तालेगांव में हो रहे थे ट्रायल्स

    राजस्थान रॉयल्स जब महाराष्ट्र के तालेगांव स्थित अपनी अकादमी में ट्रायल कर रही थी, तब वैभव सूर्यवंशी एक बाएं हाथ के तेज गेंदबाज (कर्नाटक) के खिलाफ बल्लेबाजी करने उतरे। जुबिन भरूचा उस वन ऑन वन मुकाबले को दिमाग में पहले ही समझने की कोशिश कर रहे थे, गेंद का एंगल, लेट स्विंग और संभावित नतीजा। भरूचा ने बताया, 'पहली गेंद दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए अंदर की ओर तेजी से आई थी। इसलिए मैं सोच रहा था कि जब वैभव स्ट्राइक पर आएगा, तो गेंद बाहर की ओर मूव करेगी और ऑफ स्टंप के बाहर उसे बीट कर देगी।'

    पहली गेंद और एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से छक्का

    हालांकि, हुआ इसके बिल्कुल उलट। वैभव सूर्यवंशी ने उस गेंद को एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से सीधा छक्का जड़ दिया। जुबिन भरूचा उस पल को याद करते हुए कहते हैं, 'मैं बस यही सोच रहा था, मैंने अभी क्या देखा? मैं इसे समझ ही नहीं पाया।' उन्होंने आगे कहा, 'मुझे यह बिल्कुल वैसा ही लगा जैसा मैंने पहली बार यशस्वी जायसवाल को ट्रायल में खेलते देखा था, जब उसने डीवाई पाटिल स्टेडियम में पहली ही गेंद पर शॉर्ट फाइन लेग के ऊपर से चौका मारा था। संजू सैमसन के साथ भी ऐसा ही हुआ था, जयपुर में पहली गेंद पर ही उन्होंने कुछ अलग कर दिया था। अमित सिंह ने बाउंसर डाली और उन्होंने उसे सीधे इंडोर स्टेडियम की छत पर पहुंचा दिया। पहली ही गेंद पर कुछ अलग ही किया।'

    आगे जो हुआ, वो आपको हैरान कर देगा

    अगर वैभव सूर्यवंशी की पहली झलक ने ही रोमांच पैदा कर दिया था, तो इसके बाद जो हुआ, वह और भी असाधारण था। जुबिन भरूचा बताते हैं, 'ट्रायल खत्म होने के बाद मैंने सभी खिलाड़ियों को भेज दिया। मैं नहीं चाहता था कि किसी और को असहज महसूस हो, इसलिए मैंने वैभव को अकेले वापस बुलाया। हमारे पास कुछ साइडआर्म बॉलर्स थे, जो 157-158 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंद डाल सकते थे। उनमें से एक की लंबाई करीब छह फिट चार इंच थी, तो आप उसकी रिलीज पॉइंट समझ सकते हैं।'

    'जिस तरह से वह गेंद छोड़ रहा था….'

    उन्होंने आगे कहा, 'मैंने उन्हें नई गेंद दी और कहा- इस पर अटैक करो। मैंने वैभव को बताया कि गेंद काफी तेज आएगी। उसने बस इतना कहा- हां सर, कोई दिक्कत नहीं।' शुरुआती कुछ गेंदों पर वैभव ने शॉट नहीं खेला, बल्कि उन्हें आराम से छोड़ दिया, लेकिन यहां भी उसकी खासियत दिखी। भरूचा कहते हैं, 'जिस तरह से वह गेंदों को छोड़ रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे गेंद में कोई रफ्तार ही नहीं है। विकेटकीपर 30 गज पीछे खड़ा था और वह बेहद आसानी से गेंद छोड़ रहा था।'

    'साइटस्क्रीन के ऊपर से छक्का मार दिया'

    हालांकि, असली चौंकाने वाला पल अभी बाकी था। भरूचा ने बताया, 'एक साइडआर्म गेंदबाज ने जोर से गेंद फेंकी, और वैभव ने उसे सीधा साइटस्क्रीन के ऊपर से छक्का मार दिया। मैंने तुरंत स्पीड पूछी- 157 किमी/घंटा!' भरूचा हैरान रह गए। वह बताते हैं, 'यह सामान्य नहीं है, यहां तक कि बेहतरीन खिलाड़ियों के लिए भी नहीं। इतनी तेज गेंद पर, वो भी चौथी-पांचवीं गेंद पर ऐसा शॉट खेलना, तभी आपको एहसास होता है कि यह खिलाड़ी वाकई कुछ खास है।'

    राजस्थान ने 1.1 करोड़ में वैभव को शामिल किया

    इन सभी अनुभवों को सुनाने के बाद जुबिन भरूचा को राजस्थान रॉयल्स के मालिकों को ज्यादा मनाने की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन जिस चीज ने उन्हें सबसे ज्यादा हैरान किया, वह थी इस खिलाड़ी की 'सीलिंग' यानी उसकी संभावनाओं की ऊंचाई। भरूचा बताते हैं- मैंने उनसे कहा, यह खिलाड़ी यशस्वी जायसवाल से दोगुना है। आप कुछ असाधारण देखने जा रहे हैं… यकीन नहीं होता कि ऐसा टैलेंट खुद हमारे पास आ गया है। इस मौके को मत गंवाइए।' आखिरकार राजस्थान रॉयल्स ने छोटी सी बोली जंग के बाद वैभव सूर्यवंशी को 1.1 करोड़ रुपये में खरीद लिया, जो 10 करोड़ की रकम का सिर्फ दसवां हिस्सा था, जिसे भारूचा अलग रखने की सलाह दे रहे थे। 

    आईपीएल 2025 में भी दिखा था जलवा

    फिर आया आईपीएल 2025 और वैभव ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शार्दुल ठाकुर के खिलाफ अपनी पहली ही गेंद पर छक्का और फिर एक मैच में 14 साल 32 दिन की उम्र में शतक, वह भी गुजरात टाइटंस के खिलाफ। वह टी20 में सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन गए। यह शतक सिर्फ उम्र के लिहाज से ही नहीं, बल्कि रफ्तार के मामले में भी खास था। 35 गेंदों में आया यह शतक आईपीएल इतिहास का दूसरा सबसे तेज शतक था, जो सिर्फ क्रिस गेल के 2013 में 30 गेंदों वाले शतक से पीछे रहा। साथ ही आईपीएल में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय भी बने। इस पारी के साथ ही वैभव सूर्यवंशी ने साफ कर दिया था कि आने वाले समय के स्टार की क्रिकेट में एंट्री हो चुकी है। जब 13 साल के बच्चे पर 10 करोड़ का दांव लगाने की बात हुई थी, तो वह पागलपन लगा था। आज लगता है, वह सस्ता सौदा था।

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