More
    HomeराजनीतिBJP से दूरी बनाएंगे अन्नामलाई? तमिलनाडु में सियासी अटकलें गर्म

    BJP से दूरी बनाएंगे अन्नामलाई? तमिलनाडु में सियासी अटकलें गर्म

    चेन्नई। तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई को लेकर राजनीतिक सुगबुगाहट बेहद तेज हो गई है। हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा-एनडीए गठबंधन को मिली हार के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेजी से लगाई जा रही हैं कि अन्नामलाई जल्द ही भाजपा को अलविदा कहकर अपनी एक नई क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी लॉन्च कर सकते हैं।

    सोशल मीडिया पर समर्थकों ने शुरू की तैयारी

    तमिलनाडु की राजनीति में अन्नामलाई द्वारा नई पार्टी बनाने की चर्चाएं वैसे तो समय-समय पर उड़ती रही हैं, लेकिन इस बार सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर उनके समर्थकों की सक्रियता ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। अन्नामलाई के कई कट्टर समर्थकों ने सोशल मीडिया पर उनकी संभावित नई पार्टी के नाम, राजनीतिक विचारधारा और यहां तक कि झंडे के काल्पनिक डिजाइन तक साझा करने शुरू कर दिए हैं। कुछ करीबी सूत्रों और समर्थकों का दावा है कि जून महीने के भीतर ही अन्नामलाई अपनी नई राजनीतिक पारी को लेकर कोई बड़ा और चौंकाने वाला आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं।

    पीएम के 'मन की बात' से दूरी और नीतिगत विरोध

    इन राजनीतिक अटकलों को बल अन्नामलाई के कुछ हालिया कदमों और बयानों से भी मिला है, जो सीधे तौर पर भाजपा की केंद्रीय नीतियों के उलट नजर आए। हाल ही में सीबीएसई (CBSE) द्वारा कक्षा 9 से 'तीन-भाषा नीति' (Three-Language Policy) लागू किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले की अन्नामलाई ने सार्वजनिक रूप से खुलकर आलोचना की थी, जो तमिलनाडु की स्थानीय भाषाई राजनीति के अनुकूल है। इसके अलावा, एक और चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्होंने रविवार को प्रसारित हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' को लेकर अपने सोशल मीडिया हैंडल से कोई पोस्ट या प्रचार नहीं किया, जिसे राजनीतिक विश्लेषक उनके बदले हुए रुख का बड़ा संकेत मान रहे हैं।

    AIADMK के साथ दोबारा गठबंधन से थे नाराज

    मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अन्नामलाई तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ दोबारा गठबंधन किए जाने के फैसले से अंदरूनी तौर पर बेहद नाखुश थे। पूर्व में एआईएडीएमके के साथ भाजपा का गठबंधन टूटने के बाद अन्नामलाई लगातार द्रविड़ियन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर हमलावर रहे थे और राज्य में अकेले या तीसरे मोर्चे के रूप में उभरने की वकालत कर रहे थे। हालांकि, केंद्रीय आलाकमान के दबाव के बाद उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के फैसले का सम्मान किया और एनडीए (NDA) प्रत्याशियों के लिए पूरे राज्य में सक्रिय रूप से धुआंधार चुनाव प्रचार भी किया, लेकिन नतीजों के बाद उनकी यह नाराजगी अब खुलकर सामने आ रही है।

    तमिलनाडु भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष रहे हैं अन्नामलाई

    गौरतलब है कि अपनी सख्त और ईमानदार छवि के लिए मशहूर रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने पुलिस सेवा छोड़कर राजनीति में कदम रखा था। जुलाई 2021 में मात्र 37 वर्ष की उम्र में उन्हें तमिलनाडु भाजपा की कमान सौंपी गई थी, जिससे वे राज्य में भाजपा के सबसे युवा प्रदेश अध्यक्ष बने थे। वे साल 2025 तक इस पद पर बने रहे और अपनी 'एन मण, एन मक्कल' (मेरी भूमि, मेरे लोग) पदयात्रा के जरिए उन्होंने राज्य के कोने-कोने में भाजपा को एक आक्रामक विपक्ष के रूप में स्थापित करने का काम किया था। अब देखना दिलचस्प होगा कि तमिलनाडु की 'द्रविड़ियन राजनीति' के बीच अन्नामलाई का अगला कदम राज्य के सियासी समीकरणों को किस ओर ले जाता है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here