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    Homeदुनियाभारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को मिलेगी रफ्तार? मार्को रुबियो ने दिए अहम संकेत

    भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को मिलेगी रफ्तार? मार्को रुबियो ने दिए अहम संकेत

    वाशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा है कि वाशिंगटन भारत की तेजी से बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में एक बड़ी और सहयोगी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत की ओर से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने (डाइवर्सिफिकेशन) की दूरदर्शी रणनीति का पुरजोर समर्थन करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच इस क्षेत्र में बढ़ता समन्वय दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को एक नया संबल प्रदान करेगा। व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार के दौरान विदेश मंत्री रुबियो ने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के गहरे होते आयामों के बीच, अमेरिका भारतीय बाजारों की घरेलू मांगों को पूरा करने के लिए अत्यंत सुदृढ़ स्थिति में है।

    वैश्विक तेल बाजार की स्थिरता और वेनेजुएला से कच्चे तेल की आपूर्ति

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत की आयात निर्भरता को सुरक्षित करने के लिए अलग-अलग देशों से आपूर्ति शृंखला बनाए रखने की वकालत की। उन्होंने इस पूरे परिदृश्य को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन कूटनीतिक कोशिशों से जोड़ा, जिसके तहत पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव को कम कर वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि सहयोगी राष्ट्रों के लिए बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ सके। इसी क्रम में रुबियो ने भारत के लिए कच्चे तेल के एक अन्य बड़े विकल्प के रूप में वेनेजुएला की ओर संकेत किया और बताया कि अमेरिका वहां तेल उत्पादन की क्षमता को पुनर्जीवित करने के लिए बेहद करीब से काम कर रहा है।

    भारी कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता और साझा रणनीतिक हित

    भारत की तकनीकी विशेषज्ञता की सराहना करते हुए मार्को रुबियो ने कहा कि भारतीय रिफाइनरियों के पास वेनेजुएला के 'हेवी क्रूड' (भारी कच्चे तेल) को प्रोसेस करने की एक विशेष और विश्वस्तरीय क्षमता है, जो दुनिया के बहुत कम देशों के पास उपलब्ध है। इस लिहाज से अमेरिका वेनेजुएला से भारत को होने वाली तेल आपूर्ति के विधिक व तकनीकी रास्तों को और सुगम बनाने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने आगे कहा कि ऊर्जा के अतिरिक्त दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्था, मजबूत आपूर्ति शृंखला (सप्लाई चेन), महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स), रक्षा सुरक्षा और समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता जैसे कई ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जहां दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्र के साझा रणनीतिक हित आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।

    प्रवासी भारतीयों का विशेष योगदान और द्विपक्षीय साझेदारी के मजबूत स्तंभ

    इस रणनीतिक जुड़ाव को मानवीय दृष्टिकोण से जोड़ते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने वहां रह रहे मजबूत और प्रभावशाली भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को भी विशेष रूप से सराहा, जो दोनों देशों के बीच एक जीवंत कूटनीतिक सेतु का कार्य कर रहा है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत दुनिया का सबसे तेजी से विकसित होता ऊर्जा उपभोक्ता बनकर उभरा है, जिसने अपनी विशाल घरेलू औद्योगिक मांगों को पूरा करने के लिए कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) के आयात तंत्र को आधुनिक बनाया है। ऐसे में तेल और गैस के व्यापार के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा तकनीक (क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी) और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहा यह द्विपक्षीय सहयोग आने वाले समय में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का सबसे मजबूत स्तंभ साबित होगा।

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