जयपुर: राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक स्थित विश्वप्रसिद्ध करणी माता मंदिर में शारदीय नवरात्र महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट 24 घंटे खुले रहेंगे। नवरात्र पर्व को देखते हुए मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट ने दर्शन, यातायात तथा सुरक्षा व्यवस्था के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। इस बार नवरात्र के इतिहास में पहली बार मंदिर के भीतर पांच अलग-अलग कतारों के माध्यम से श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन करवाए जाएंगे। नवरात्र शुरू होने से पहले ही देश के कोने-कोने से माता के भक्तों के देशनोक पहुंचने का सिलसिला तेजी से शुरू हो चुका है, और इस पावन अवसर पर पूरे कस्बे व धाम को रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया है।
पांच कतारों में दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा के लिए 150 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात
त्योहार के दौरान देशनोक में उमड़ने वाली भारी भीड़ और सुगम यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। देशनोक थानाधिकारी सुमन शेखावत ने जानकारी दी कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में 150 से अधिक पुलिस जवानों को तैनात किया गया है। इसके अलावा, 6 विशेष पुलिस मोबाइल पार्टियां भी लगाई गई हैं, जो पूरे शहर और मंदिर मार्ग पर लगातार गश्त करेंगी। ये दल मंदिर आने-जाने वाले मुख्य मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर रखेंगे।
करणी सागर मैदान में वाहन पार्किंग और 250 सेवादार तैनात
श्रद्धालुओं के वाहनों की सुगम आवाजाही और सुव्यवस्थित पार्किंग के लिए 'करणी सागर मैदान' को निर्धारित किया गया है। भक्तों के मार्गदर्शन और सहायता के लिए मंदिर ट्रस्ट की ओर से 250 से अधिक प्रशिक्षित सेवादारों की ड्यूटी लगाई गई है। ये सेवादार श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से दर्शन कराने और भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे। दूर-दराज से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में टेंट, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा शिविर जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और 18 अक्टूबर को मां करणी का जन्मोत्सव
शारदीय नवरात्र का यह महापर्व 11 अक्टूबर, रविवार को घट स्थापना के साथ आरंभ होगा। पंडित नरोत्तम दास मिश्रा के सान्निध्य में सुबह 9:32 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक विधि-विधान के साथ मां की पूजा-अर्चना कर घट स्थापना की जाएगी। इसी शुभ मुहूर्त में प्रदेशभर के श्रद्धालु अपने घरों में भी घट स्थापना करेंगे। इस पूरे नौ दिवसीय अनुष्ठान का मुख्य आकर्षण 18 अक्टूबर को मनाया जाने वाला मां करणी का प्रकटोत्सव (जन्मोत्सव) होगा, जिस अवसर पर देशनोक शहर में एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है।
संगीत संध्या और विराट कवि सम्मेलन का होगा आयोजन
जन्मोत्सव के इस पावन कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत 17 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे करणी महाई पैलेस में मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात, 18 अक्टूबर को रात्रि 10 बजे मुख्य मंदिर के ठीक सामने स्थित प्रांगण में भव्य करणी भक्ति संगीत संध्या सजेगी। वहीं, 19 अक्टूबर को रात्रि 10 बजे 'मनुज देवावत की स्मृति' में एक विशाल अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
सांभर: मां शाकंभरी मंदिर में घट स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र का भव्य शुभारंभ
सांभर: विश्वप्रसिद्ध सांभर नमक झील के मध्य स्थित ऐतिहासिक शक्तिपीठ और चौहान वंश की कुलदेवी मां शाकंभरी माता मंदिर में रविवार को घट स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र महोत्सव का भव्य शुभारंभ हो गया है। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद मंदिर परिसर में नौ दिवसीय विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। इस नवरात्र पर्व पर माता के दर्शन और अनुष्ठानों के लिए राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
नौ दिनों तक माता का होगा विशेष श्रृंगार और अनुष्ठान
माता शाकंभरी मंदिर प्रबंधन न्यास के अध्यक्ष कुलदीप व्यास ने बताया कि नवरात्र के इन नौ दिनों के दौरान मां शाकंभरी का प्रतिदिन अलग-अलग स्वरूपों में विशेष श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर में नित्य पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रमों का क्रम अनवरत जारी रहेगा, जिससे पूरा मंदिर परिसर अलौकिक भक्तिमय वातावरण में डूबा रहेगा। देश के दूर-दराज इलाकों से आने वाले भक्त माता के दरबार में हाजिरी लगाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना करेंगे।
जात-जडूले और सवामणी के लिए उमड़ेंगे श्रद्धालु
शारदीय नवरात्र के इस पवित्र अवसर पर मां शाकंभरी के दरबार में भक्तों की गहरी आस्था देखने को मिलती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर बच्चों के जात-जडूले चढ़ाने और सवामणी प्रसाद का आयोजन करने के लिए मंदिर पहुंचेंगे। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से निःशुल्क विश्राम गृह, भोजन और पेयजल की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है, ताकि दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।


