ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में इक्षु रस से आहार, भक्ति से गूंजा तीर्थ अयोध्या
अयोध्या। अक्षय तृतीया का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री भगवान ऋषभदेव बड़ी मूर्ति दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज में विशेष धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें भगवान ऋषभदेव का इक्षु रस (गन्ने का रस) से आहार कराया गया।
कार्यक्रम जैन धर्म की गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के पावन सानिध्य में एवं मुनि श्री सोमदत्त सागर जी महाराज की उपस्थिति में आयोजित हुआ। प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन के निर्देशन में भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा को आहारचर्या के लिए निकाला गया।
जैन शास्त्रों के अनुसार भगवान ऋषभदेव के काल में लोगों को आहार देने की विधि का ज्ञान नहीं था, जिसके कारण उन्हें एक वर्ष 39 दिन तक आहार प्राप्त नहीं हुआ। बाद में हस्तिनापुर नगरी में राजा श्रेयांस को पूर्व जन्म का स्मरण हुआ और उन्होंने नवधा भक्ति पूर्वक भगवान को इक्षु रस का आहार कराया। इसी परंपरा की स्मृति में अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है।
इस अवसर पर गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ने कहा कि यह आहारदान का पर्व संपूर्ण जीवों के लिए मंगलकारी है। इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि प्राचीन परंपरा के अनुसार जैन साधुओं को नवधा भक्ति से आहार देकर इस पर्व का वास्तविक महत्व समझा जा सकता है।
अयोध्या तीर्थ पर राजा श्रेयांस के रूप में सुभाषचंद जैन सर्राफ (इंद्रानगर, लखनऊ) ने भगवान का पड़गाहन कर प्रथम आहारदान का सौभाग्य प्राप्त किया। इसके साथ ही कैलाशचंद जैन, पुखराज पांड्या, अंजय जैन, डॉ. राधा जैन, दिनेश जैन, अरिंजय जैन, डॉ. जीवन प्रकाश जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने आहारदान किया।
आहारदान के पश्चात पंचाश्चर्य की वृष्टि का आयोजन किया गया, जिसमें रत्नवृष्टि, पुष्पवृष्टि, गंधोदक वृष्टि एवं देवदुंदुभि की जय-जयकार से वातावरण भक्तिमय हो गया। पूरा कार्यक्रम पीठाधीश स्वस्तिश्री रविन्द्रकीर्ति स्वामी जी के निर्देशन एवं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माताजी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
अंत में सभी श्रद्धालुओं को गन्ने के रस का प्रसाद वितरित किया गया और कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
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