धर्म मजबूरी में नहीं इच्छा से किया जाए तो ही पुण्यदायी, आचार्य पुलकसागर ससंघ के सानिध्य में पर्युषण में पाप नाशनम शिविर 16 से 25 सितम्बर तक
भीलवाड़ा। जो तीर्थंकरों की जिनवाणी को पहचान लेता है वह अपनी आत्मा को जान लेता है। भगवान को जाने बिना अपने आप को भी नहीं पहचान पाएंगे। मोक्ष कभी मजबूरी में नहीं इच्छा से मिलता है। जिसके पास कुछ नहीं वह अपरिग्रही नहीं बल्कि जो स्वेच्छा से त्याग करे वहीं अपरिग्रही होता है। धर्म मजबूरी में नहीं इच्छा से किया जाए तो ही पुण्यदायी होता है। मजबूरी में की जाने वाली आराधना धर्म नहीं हो सकती। मन से किया जाने वाला धर्म ही सार्थक होता है।
ये विचार श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में गुरूवार को चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जीवन में परमानंद की अनुभूति ही कल्याण है। अभय धर्म की पालना करने वाला लिमिटेड को अनलिमिटेड बना देता है। अष्टद्रव्य नष्ट हो सकते पर आपको जो मिला वह नष्ट होने वाला नहीं है। केवलज्ञान ओर मोक्षफल को खरीदा नहीं जा सकता ये अरिहन्त ओर सिद्ध की आराधना करने से ही प्राप्त हो सकते है।
आचार्यश्री ने कहा कि धर्म अज्ञान से नहीं बल्कि ज्ञान से होता है। अज्ञानता में किए जाने वाले धर्म के कारण ही अनादिकाल से मोक्ष नहीं जा पा रहे है।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि राजा वैभवशाली होता है जिसके सामने जाने से सारे दुःख दूर हो जाते है। जिन वैभव है तो उनकी प्रतिमा भी वैभवशाली होनी चाहिए। वह अनंत गुणों के स्वामी होते है। उनका तेज इतना प्रबल होता है कि भगवान के समोवशरण में कभी रात नहीं होती है। सौधर्म इन्द्र के अलावा किसी में दम नहीं जो भगवान का समोवशरण बना सके। समोवशरण वितरागी तीन लोक के नाथ के वैभव का प्रतीक है जिनके चरणों में देवता भी झुकते है। पूजा अभिषेक वितरागियों का वैभव है।
उन्होंने कहा कि दिगम्बर मुनि नग्न हो सकता लेकिन मूर्ख नहीं होता, वह ज्ञानी होता है। वह विवेक के साथ आचारवान एवं चरित्रवान होता है। भगवान के दर पर जो भी जाता है वह सुखी हो जाता है। समोवशरण में कोई दुःखी भी चला जाए तो उसे अनंत सुखों की प्राप्ति होती है। आचार्यश्री ने कहा कि व्यक्ति आपसे नहीं आपके वैभव से प्रभावित होता है। संत का वैभव उसकी पिच्छिका एवं कमंडल होता है। भगवान की पूजा हमेशा वैभवशाली बनकर श्रृंगार के साथ ही करनी चाहिए।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में पर्युषण (दशलक्षण) पर्व की साधना 16 से 25 सितम्बर तक सूर्यमहल में होगी। इस अवधि में दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर का भी आयोजन किया जाएगा। इस शिविर के लिए अब तक 500 से अधिक श्रावक श्राविकाएं पंजीयन करा चुके है। इस विशेष शिविर को लेकर श्रावक श्राविकाओं में उत्साह का माहौल है।
प्रवचन के शुरू में दीप प्रज्वलन,पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट मैन सेक्टर शास्त्रीनगर ने प्राप्त किया। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि प्रतिदिन चातुर्मासिक प्रवचन सुबह 8.30 से 10 बजे तक सूर्यमहल में हो रहे है। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


