आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भक्तिभाव से हुआ अभिषेक, सुख-समृद्धि और आत्मकल्याण की कामना को लेकर श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
लक्ष्मणगढ़। जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक गुरुवार को लक्ष्मणगढ़ स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जैन समाज के अनुयायियों ने भगवान शांतिनाथ की विशेष पूजा-अर्चना कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
जैन शास्त्रों में गर्भ कल्याणक का विशेष महत्व
जैन शास्त्रों के अनुसार भगवान शांतिनाथ का जीव सर्वार्थसिद्धि विमान से च्युत होकर भादों वदी सप्तमी के दिन माता ऐरा देवी के पवित्र गर्भ में आया था। इसी पावन प्रसंग की स्मृति में भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक मनाया जाता है।
गर्भ कल्याणक के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ किया और भगवान शांतिनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
अभिषेक के बाद हुई विशेष शांतिधारा
आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा का अभिषेक किया गया। इसके बाद विश्व शांति एवं मंगल की कामना को लेकर विशेष शांतिधारा की गई।
भगवान शांतिनाथ को शांति का अधिष्ठाता देव माना जाता है। इसी भाव के साथ श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होकर परिवार एवं समाज में सुख-शांति की कामना की।
णमोकार मंत्र का किया जाप
धार्मिक आयोजन के दौरान भक्तगणों ने णमोकार मूल मंत्र का जाप किया। श्रद्धालुओं ने सुख, समृद्धि, शांति और आत्मकल्याण की कामना के साथ भगवान शांतिनाथ की आराधना की।
इस अवसर पर जैन समाज के महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे। मंदिर परिसर में पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा और भक्तिभाव का वातावरण बना रहा।
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