अलवर : अदिति ने तय किया था इस बार कुछ अलग करेंगे
(अगर आप भी अपने बच्चों के जन्मदिन, अपना खुद का जन्मदिन , विवाह की वर्षगांठ या अन्य कार्यक्रम इस तरह के संस्थानों में जाकर मनाते है तो हमें फोटो सहित डिटेल भेज दे ताकि मिशन सच में इसे प्रकाशित किया जा सके। इसके प्रकाशन से दूसरे लोगों को प्रेरणा मिले यह ही हमारा प्रयास रहेगा। मोबाइल 9649856000 )
मिशनसच न्यूज, अलवर। शहर के छीतरमल लाटा मानसिक विमंदित पुनर्वास केन्द्र में रहने वाले करीब 40 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की दुनिया भले ही सीमित हो, लेकिन उनके जीवन की कहानियां बेहद गहरी और मार्मिक हैं। यहां हर चेहरा एक अलग पीड़ा को समेटे हुए है। कोई परिवार से बिछड़ गया, तो किसी को किस्मत ने ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया जहां सहारा सिर्फ यह आश्रय स्थल ही बन सका।
इस केन्द्र की दीवारें मानो इन बच्चों की खामोश कहानियों की साक्षी हैं। दिनभर में कई बार उनकी आहें इन दीवारों से टकराती हैं, लेकिन अफसोस, उनकी पथराई आंखें अपनी तकलीफ किसी से बयां नहीं कर पातीं। यहां रहने वाले ये 40 बच्चे केवल संख्या नहीं, बल्कि 40 ऐसी जिंदगियां हैं, जिनकी अपनी-अपनी अधूरी कहानियां हैं।
इसी संवेदनशील माहौल के बीच रविवार को एक अनोखा और भावुक क्षण देखने को मिला, जब अदिति लूथरा ने अपना 17वां जन्मदिन इन बच्चों के साथ मनाने का निर्णय लिया। आमतौर पर जहां जन्मदिन पार्टियां चमक-दमक और दिखावे के बीच मनाई जाती हैं, वहीं अदिति ने अपने इस खास दिन को सेवा और संवेदना से जोड़कर एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया। अदिति वरिष्ठ पत्रकार हरमिंदर लूथरा की बेटी है।
अदिति अपने परिवार के साथ पुनर्वास केन्द्र पहुंचीं और वहां बच्चों के बीच मिठाई वितरित की। इससे उनके चेहरों पर मासूम मुस्कान फैल गई। कुछ बच्चे अपनी दुनिया में खोए हुए थे, तो कुछ ने तालियां बजाकर खुशी जाहिर की। उस पल ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। अदिति ने बच्चों को मिठाइयां और उपहार वितरित किए, जिससे उनके चेहरों पर सच्ची खुशी देखने को मिली।
अदिति चाहती थी कि इस बार जन्मदिन सिर्फ एक औपचारिकता न रहकर समाज के लिए कुछ सकारात्मक संदेश दे। इसी सोच के साथ उन्होंने इस केन्द्र को चुना, जहां बच्चों के साथ समय बिताना उनके लिए एक अनमोल अनुभव रहा। परिवार का कहना था कि इस पहल ने उन्हें जीवन की वास्तविकताओं से रूबरू कराया और यह दिन उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।
केन्द्र के संचालकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास इन बच्चों के जीवन में बड़ी खुशी लेकर आते हैं। समाज के अन्य लोगों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए कि वे अपने खास पलों को जरूरतमंदों के साथ साझा करें।
यह आयोजन न सिर्फ एक जन्मदिन का जश्न था, बल्कि यह संदेश भी था कि थोड़ी सी संवेदना और समय देकर किसी के जीवन में खुशी की किरण लाई जा सकती है। अदिति लूथरा का यह कदम निश्चित रूप से समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
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