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    अलवर की विभिन्न बस्तियों में विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित, कलश यात्राओं से गूंजा वातावरण

    सम्मेलन में संस्कार, स्वदेशी व्यापार, कुटुंब प्रबोधन और सामाजिक समरसता पर वक्ताओं ने रखा जोर

    अलवर। शहर की रूपबास बस्ती, सुभाष नगर (एनईबी अनाज मंडी के पीछे) और मालन की गली सहित विभिन्न क्षेत्रों में रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रमों की शुरुआत भव्य कलश यात्रा और शोभायात्रा के साथ हुई, जिसमें महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। तेज मंडी क्षेत्र में निकाली गई शोभायात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।

    रूपबास बस्ती में आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता रामगोपाल छिपा, अमरचंद फौजी, कैलाशचंद मीणा और गिरिराज प्रसाद वाल्मीकि ने की। मुख्य वक्ता समाजसेवी डॉ. के.के. गुप्ता ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने पुश्तैनी कार्यों को अपनाने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी नौकरी के इंतजार में समय व्यर्थ न करें, बल्कि पारंपरिक व्यवसाय और स्वदेशी व्यापार को बढ़ावा देकर अपनी आय के स्रोत मजबूत करें। उन्होंने देश, गौरव, संस्कार और मर्यादा के संरक्षण पर बल दिया।

    तेज मंडी क्षेत्र में संत शिरोमणि ब्रह्म मुनि जी महाराज की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ। पुरुषोत्तम अग्रवाल और मुख्य वक्ता रोहित जी ने संयुक्त परिवार की परंपरा को भारतीय समाज की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि यदि परिवार संस्कारवान होगा तो राष्ट्र मजबूत बनेगा। छोटे बच्चों में संस्कार, समरसता और नागरिक कर्तव्य की भावना संयुक्त परिवार व्यवस्था से ही विकसित होती है।

    सुभाष बस्ती में आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता रमेश खंडेलवाल ने की। मुख्य वक्ता प्रेम सिंह राजावत ने कुटुंब प्रबोधन पर जोर देते हुए कहा कि परिवारों के टूटने और गांवों से शहरों की ओर पलायन की प्रवृत्ति चिंता का विषय है। उन्होंने सप्ताह में एक बार सहभोज कार्यक्रम आयोजित करने, वीर-भूमिया और इष्ट देवी-देवताओं के दर्शन कर सामाजिक एकता बढ़ाने का सुझाव दिया। साथ ही युवाओं को नशामुक्त और देशभक्ति से युक्त बनाने की आवश्यकता बताई।

    मालन की गली में आयोजित सम्मेलन में मुख्य वक्ता गजराज गौड़ ने समाज के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संभावित समस्याओं के समाधान के लिए पहले से ही साझा प्रयास जरूरी हैं। सज्जन शक्ति के समन्वय और सक्रिय भागीदारी से ही समाज सशक्त बनेगा। उन्होंने शताब्दी वर्ष के अवसर पर पंच परिवर्तन—सामाजिक समरसता, स्व का बोध, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य—के माध्यम से समाज को दिशा देने का आह्वान किया।

    वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की और संगठित व जागरूक रहने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रमों का समापन भारत माता की आरती और प्रसाद वितरण के साथ किया गया।

    सम्मेलनों में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, युवा कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता, एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ किया जाएगा।

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