संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसानों से गांवों में अभियान चलाने की अपील की
जयपुर। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) राजस्थान ने देशभर के किसानों से अपील की है कि वे संसद के आगामी सत्र के पहले दिन 9 मार्च 2026 से पूर्व अपने-अपने गांवों में जनसभाएं आयोजित करें। इन जनसभाओं में प्रस्ताव पारित कर भारत की राष्ट्रपति के नाम एक खुला पत्र भेजा जाएगा। मोर्चा का कहना है कि यह कदम भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के संभावित प्रभावों को लेकर किसानों की चिंताओं को सामने लाने के लिए उठाया जा रहा है।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के अनुसार प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय कृषि, लघु एवं सीमांत किसानों और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। प्रेस-विज्ञप्ति जारी करते हुए डॉ. संजय “माधव” ने बताया कि गांव-गांव से डाकघरों तक जुलूस निकालकर राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली के नाम ज्ञापन भेजे जाएंगे। यह पत्र ग्राम सभाओं की सार्वजनिक बैठकों में स्वीकृत किया जाएगा।
राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
राष्ट्रपति को भेजे जाने वाले खुले पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह करने की मांग की गई है कि वे अमेरिका के साथ ऐसा कोई भी व्यापार समझौता न करें जो कृषि क्षेत्र के लिए हानिकारक सिद्ध हो। साथ ही केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल को पद से हटाने की मांग उठाई गई है। किसानों का आरोप है कि वार्ता प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और किसानों के हितों की अनदेखी की गई।
इसके अतिरिक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन् द्वारा 9 जनवरी 2026 को राज्यों को भेजे गए पत्र को वापस लेने की मांग भी की गई है, जिसमें धान और गेहूं किसानों को दिए जा रहे बोनस को समाप्त करने का आग्रह किया गया था।
आयात शुल्क और सब्सिडी पर चिंता
मोर्चा का कहना है कि यदि अमेरिका से कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त किया गया तो कपास, मक्का, सोयाबीन, गेहूं, डेयरी और बागवानी क्षेत्र पर व्यापक असर पड़ेगा। किसानों ने तर्क दिया कि अमेरिका में कृषि को भारी सब्सिडी और आधुनिक तकनीक का समर्थन मिलता है, जबकि भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं। ऐसे में प्रतिस्पर्धा असमान होगी और घरेलू बाजार में कीमतें गिर सकती हैं।
नेताओं ने यह भी कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा समझौते को लेकर की गई घोषणाओं से कई सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना है कि संसद में इस विषय पर स्पष्ट और विस्तृत बयान दिया जाना चाहिए था।
विभिन्न फसलों पर संभावित प्रभाव
संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने बयान में कपास, मक्का, सोयाबीन और डेयरी उत्पादों के आयात में वृद्धि से होने वाले संभावित नुकसान की आशंका जताई है। उनका कहना है कि यदि शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी गई तो घरेलू उत्पादन और किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
विशेष रूप से मक्का और सोयाबीन जैसे फसलों के मामले में अमेरिका का उत्पादन भारत की तुलना में कई गुना अधिक है। इसी प्रकार डेयरी क्षेत्र में भी अमेरिकी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा भारतीय छोटे दुग्ध उत्पादकों के लिए चुनौती बन सकती है।
राजस्थान में अभियान की रूपरेखा
संयुक्त किसान मोर्चा, राजस्थान ने राज्य के सभी जिलों में ग्राम सभाओं के माध्यम से किसानों को जागरूक करने और प्रस्ताव पारित करने की रणनीति बनाई है। जिला और ब्लॉक स्तर पर बैठकें आयोजित कर किसानों को समझौते के संभावित प्रभावों की जानकारी दी जाएगी।
मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा। किसानों से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में जनसभाओं में भाग लेकर अपनी बात लोकतांत्रिक ढंग से रखें।
संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि यह पहल केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा विषय है। ऐसे में व्यापक जनभागीदारी आवश्यक है ताकि सरकार तक किसानों की आवाज प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
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