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    अलवर के जैन मंदिर में हुई 700 मुनियों की आराधना, रक्षाबंधन पर गूंजा धर्म और संयम का संदेश

    अलवर, । रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर शुक्रवार को अलवर के स्कीम नंबर 10 स्थित जैन मंदिर में धार्मिक श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहा। दिगम्बर जैन संत मुनि श्री 108 सौम्य सागर महाराज एवं मुनि श्री 108 निश्चल सागर महाराज के सानिध्य में मुनि विष्णु कुमार की पूजा-अर्चना कर 700 मुनियों की आराधना की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर मुनि परंपरा, श्रमण संस्कृति और अहिंसा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

    कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल जैन मंदिर में श्रीजी के अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्य नियम पूजन के साथ हुई। इसके पश्चात मुनि सौम्य सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में रक्षाबंधन पर्व से जुड़े धार्मिक प्रसंग के तहत मुनि विष्णु कुमार की विशेष पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हुए अर्घ्य समर्पित किए और श्रीफल चढ़ाए। मंदिर परिसर में इस दौरान भक्ति और धार्मिक जयघोष का वातावरण बना रहा।

    धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया गया। इसके साथ ही शास्त्र भेंट, चित्र अनावरण सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। समाज के महिला-पुरुषों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए और संतों के दर्शन एवं प्रवचन का लाभ लिया।

    700 मुनियों की रक्षा से जुड़ा है रक्षाबंधन का जैन प्रसंग

    मुनि सौम्य सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में रक्षाबंधन पर्व के जैन धर्म से जुड़े ऐतिहासिक एवं धार्मिक प्रसंग पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जैन परंपरा में रक्षाबंधन का संबंध केवल भाई-बहन के स्नेह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रमण संस्कृति और साधु-संतों की रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व भी माना जाता है।

    उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में 700 मुनियों पर उपसर्ग आया था। उस समय मुनि विष्णु कुमार ने अपनी शक्ति और साधना के प्रभाव से उस उपसर्ग को दूर किया तथा 700 मुनियों की रक्षा की। इसी धार्मिक प्रसंग की स्मृति में जैन समाज में रक्षाबंधन पर्व को विशेष आध्यात्मिक महत्व के साथ मनाया जाता है।

    मुनि सौम्य सागर महाराज ने कहा कि रक्षाबंधन केवल बाहरी बंधन का पर्व नहीं, बल्कि धर्म, संयम और श्रमण संस्कृति की रक्षा का संदेश देने वाला पर्व है। उन्होंने कहा कि जीवन में धर्म और संयम का मार्ग अपनाने से ही अहिंसा का मार्ग खुलता है और अहिंसा के माध्यम से मानव जीवन मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

    उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि पर्वों को केवल परंपरा के रूप में मनाने के बजाय उनके पीछे छिपे आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। धर्म और संयम के सिद्धांतों को अपनाकर ही व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन, पूजन और मंगल प्रवचन का लाभ लिया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।

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