अलवर, । जैन धर्मावलम्बियों के 11वें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव शुक्रवार को शहर के अहिंसा स्थल स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में जिनेन्द्र भक्ति एवं धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। चातुर्मास पर विराजमान बालाचार्य मुनि अभिनन्दन सागर महाराज के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रेयांसनाथ के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित कर मोक्ष कल्याणक की आराधना की।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। भक्तों ने भगवान श्रेयांसनाथ की प्रतिमा के समक्ष विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और तीर्थंकर के गुणों का स्मरण करते हुए मोक्ष मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। निर्वाण लाडू अर्पित किए जाने के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
इस अवसर पर बालाचार्य मुनि अभिनन्दन सागर महाराज ने कहा कि जैन धर्म में देव, शास्त्र और गुरु को जीवन में विशेष स्थान दिया गया है। प्रत्येक श्रावक को देव, शास्त्र और गुरु की रक्षा तथा उनके प्रति श्रद्धा बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि अपने आचरण और संस्कारों के माध्यम से भी होती है।
मुनि अभिनन्दन सागर महाराज ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के स्नेह का पर्व नहीं है, बल्कि जैन परंपरा में इसे जैन मुनियों की रक्षा और धर्म की रक्षा के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे धर्म, संस्कृति और अहिंसा के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं तथा आने वाली पीढ़ी को भी इन संस्कारों से जोड़ें।
उन्होंने कहा कि भगवान के मोक्ष कल्याणक का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि उनके जीवन और उपदेशों से प्रेरणा लेकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना है। जैन धर्म में तीर्थंकरों के पंचकल्याणक श्रद्धालुओं को त्याग, तप, संयम, अहिंसा और आत्मशुद्धि का संदेश देते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रेयांसनाथ के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और समाज, परिवार तथा स्वयं के जीवन में धर्म के सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प लिया।


