यूएन रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रिसनर ने बताया नालंदा को विश्व की महान आवासीय यूनिवर्सिटी, अभय के. की पुस्तक पर हुआ संवाद
नई दिल्ली | यूनेस्को और भारत में संयुक्त राष्ट्र (UN) के सहयोग से प्रसिद्ध लेखक एवं राजनयिक अभय के. की बहुचर्चित पुस्तक ‘नालंदा: हाउ इट चेंज्ड द वर्ल्ड’ पर एक विशेष और भव्य सत्र का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में देश-विदेश के कई जाने-माने राजनयिकों, शिक्षाविदों, शोध विशेषज्ञों और बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया, जहाँ उन्होंने प्राचीन भारत के इस महान शिक्षा केंद्र और उसकी वैश्विक विरासत पर विस्तार से चर्चा की।
यूएन रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रिसनर के विचार
इस अवसर पर भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रिसनर ने नालंदा के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि नालंदा एक ऐसा विषय है जो ज्ञान अर्जन, संवाद की शक्ति और विचारों के खुले आदान-प्रदान से गहराई से जुड़ा हुआ है, और संयुक्त राष्ट्र इन मूल्यों का पूरा समर्थन करता है।
यूएन प्रमुख ने अपनी बात रखते हुए कहा, “भारत आने से पहले मुझे यूरोप के उस शहर में अपनी शिक्षा प्राप्त करने पर बड़ा गर्व था जहाँ दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी बोलोग्ना स्थित है, जिससे ‘यूनिवर्सिटी’ शब्द की उत्पत्ति हुई है। लेकिन नालंदा उससे भी लगभग 600 साल पुरानी है।”
दुनिया की पहली महान आवासीय और वैश्विक यूनिवर्सिटी
नालंदा के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए उन्होंने आगे कहा कि यह इतिहास की पहली महान आवासीय आधुनिक यूनिवर्सिटी थी, जहाँ चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, मंगोलिया, श्रीलंका और मध्य तथा दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों से विद्वान और विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करने आते थे। यह प्राचीन संस्थान दर्शनशास्त्र, विज्ञान, गणित, चिकित्सा और कला के अध्ययन का प्रमुख वैश्विक केंद्र हुआ करता था।
यह एक ऐसी खुली जगह थी जहाँ विचारों पर मंथन होता था, अकादमिक बहसें होती थीं और उन्हें स्वतंत्र रूप से साझा किया जाता था—एक ऐसा अनूठा पैमाना जिसे दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा था।
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