विकास कार्यों को लेकर जिला परिषद बैठक में हंगामा, कलेक्टर की अनुपस्थिति पर बोले जिला प्रमुख— टिप्पणी नहीं करूंगा
अलवर। जिला परिषद सभागार में शुक्रवार को आयोजित जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक में जिले के विकास कार्यों, पेयजल, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य जनहित के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रमुख बलवीर सिंह छिल्लर ने की। बैठक में मुंडावर विधायक ललित यादव, जिला परिषद सदस्य एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही।
बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए पेयजल संकट, विद्युत आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं, ग्रामीण सड़कों, सिंचाई और विकास योजनाओं की धीमी प्रगति पर अधिकारियों से जवाब मांगा। कई विभागों को लंबित कार्यों में तेजी लाने और जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में जिला प्रमुख बलवीर सिंह छिल्लर ने कहा कि साधारण सभा का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा करना और विकास कार्यों को गति देना है। उन्होंने कहा कि सभी सुझावों और शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर की अनुपस्थिति पर जिला प्रमुख का जवाब
जिला कलेक्टर की बैठक में गैरमौजूदगी को लेकर पूछे गए प्रश्न पर जिला प्रमुख ने कहा कि जिला कलेक्टर उनके अधीन नहीं आती हैं, इसलिए वे इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अलवर जिले में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि जिला कलेक्टर साधारण सभा की बैठकों में शामिल नहीं होती हैं।
‘चक्की’ लेकर पहुंचे जिला पार्षद, किया प्रतीकात्मक विरोध
बैठक के दौरान जिला पार्षद संदीप फौलाद पुरिया विकास कार्यों में कथित सुस्ती के विरोध में प्रतीकात्मक रूप से एक चक्की लेकर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के विकास को लेकर बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन आज भी गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल और किसानों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उनका कहना था कि विकास कार्यों की गति थम गई है और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
“कचौरी-समोसे खाकर लौट जाते हैं अधिकारी”
मुंडावर विधायक ललित यादव ने भी अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारी हर बैठक में आते हैं, “कचौरी-समोसे खाते हैं और चले जाते हैं, लेकिन जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होता।” उनका आरोप था कि बैठकों का उद्देश्य केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों ने रखीं कई प्रमुख मांगें
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने बिजली आपूर्ति में सुधार, पेयजल संकट के स्थायी समाधान, ग्रामीण सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने तथा किसानों से जुड़े लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की मांग की। उन्होंने सरकार और प्रशासन से विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
बैठक के अंत में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई कर अगली बैठक तक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
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