कृषि बैठक में विक्रेताओं को प्रशिक्षण के साथ नियमों की जानकारी, खरीफ सीजन को लेकर तैयारियां तेज
अलवर। जिले में खरीफ फसल बुवाई से पूर्व कृषि विभाग द्वारा कृषि आदान विक्रेताओं के प्रशिक्षण एवं उर्वरक वितरण प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में विक्रेताओं को नियमों के तहत कारोबार करने और उर्वरक वितरण को सुव्यवस्थित रखने के निर्देश दिए गए।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक पी.सी. मीणा ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी खरीफ सीजन में किसानों को समय पर और उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराना है। उन्होंने सभी विक्रेताओं को निर्देशित किया कि वे उर्वरक का वितरण निर्धारित दरों पर पीओएस मशीन के माध्यम से ही करें और सभी आवश्यक रिकॉर्ड का संधारण सही तरीके से करें।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि जिले में वर्तमान में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। अधिकारियों ने विक्रेताओं से पारदर्शिता बनाए रखने और नियमों का पालन करने पर जोर दिया।
इस दौरान कृषि अधिकारी जितेंद्र सिंह फौजदार और बृजेन्द्र कुमार गोयम ने उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985, बीज नियंत्रण आदेश 1983 और कीटनाशी अधिनियम 1968 के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विक्रेताओं को इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचने के निर्देश दिए।
सहायक निदेशक कृषि मंगतूराम शर्मा और सहायक विश्राम मीणा ने विक्रेताओं को अपने प्रतिष्ठानों पर मूल्य सूची और स्टॉक की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को सही जानकारी मिल सकेगी और पारदर्शिता बनी रहेगी।
बैठक में कृषि अधिकारी महेंद्र यादव और धर्मेश कुमार मीणा सहित रामगढ़, लक्ष्मणगढ़, कठूमर, गोविंदगढ़, रैणी, थानागाजी, राजगढ़ और मालाखेड़ा क्षेत्रों के कई आदान विक्रेता मौजूद रहे।
कृषि विभाग की इस पहल से खरीफ सीजन में उर्वरक वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने और किसानों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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