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    अलवर में विश्वविद्यालय आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, भेदभाव के आरोपों ने पकड़ा तूल

    अलवर में सह आचार्य की याचिका पर सुनवाई, उच्च न्यायालय ने जारी किए नोटिस

    अलवर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय के एक आदेश पर रोक लगाते हुए मामले में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई बाबू शोभाराम राजकीय कला महाविद्यालय के सह आचार्य डॉ. महेश गोठवाल की याचिका पर की गई।

    न्यायालय ने 28 फरवरी 2024 के विश्वविद्यालय आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए प्रमुख शासन सचिव उच्च शिक्षा, कुलगुरु, कुलसचिव और शोध समन्वयक को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 1 जुलाई 2026 को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    भेदभाव और नियमों के उल्लंघन के आरोप

    याचिकाकर्ता डॉ. महेश गोठवाल ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने नियमों की अवहेलना करते हुए जातिगत भेदभाव के कारण उन्हें शोध कार्य से वंचित कर दिया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

    शोधार्थियों के आवंटन को लेकर विवाद

    जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय द्वारा डॉ. गोठवाल को रिसर्च सुपरवाइजर के रूप में पंजीकृत कर तीन शोधार्थी आवंटित किए गए थे। शोध कार्य लगभग पूर्ण होने की स्थिति में था, लेकिन आरोप है कि विश्वविद्यालय ने बिना सहमति और एनओसी के इन शोधार्थियों को अन्य विषयों के पर्यवेक्षकों को स्थानांतरित कर दिया।

    इस कार्रवाई को राज्यपाल सचिवालय के दिशा-निर्देशों और राजस्थान विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन बताया गया है।

    न्यायालय के हस्तक्षेप से मिली राहत

    उच्च न्यायालय द्वारा आदेश पर रोक लगाए जाने को याचिकाकर्ता ने राहत भरा कदम बताया है। उन्होंने इसे अपनी “अकादमिक हत्या” बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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