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    Homeअलवर में सामूहिक विवाह समारोह से पूर्व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम,

    अलवर में सामूहिक विवाह समारोह से पूर्व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम,

    अलवर : हल्दी-मेहंदी और महिला संगीत ने बांधा समां

    अलवर। संस्कार, संवेदना और सामूहिक सौहार्द का अनुपम संगम उस समय देखने को मिला, जब श्री राम जानकी विवाह समिति के तत्वावधान में सार्वजनिक विवाह समारोह से पूर्व सेवा भारती समिति, अलवर द्वारा आदर्श विद्या मंदिर, मालवीय नगर में हल्दी, मेहंदी एवं महिला संगीत कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना से हुआ, जिसमें कल्याणी जी, निर्मला जी, पायल जी, अर्चना गुप्ता जी एवं रजनी मित्तल जी ने भावपूर्ण प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद सिलाई केंद्र संतोष जी की किशोरियों ने “दुल्हन के हाथों में मेहंदी लगाओ” प्रस्तुत कर उत्सव में उल्लास घोल दिया।

    पायल जी की प्रस्तुति “मेहंदी रचने लगी हाथों में” ने शृंगार रस को जीवंत किया, वहीं “बन्नो तेरी हल्दी में आया है सारा परिवार” गीत पर सेवा भारती समूह एवं कन्या पक्ष के परिजनों ने पारिवारिक एकता का संदेश दिया।

    निर्मला शर्मा एवं निशा शर्मा ने “मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुल्हनिया” के माध्यम से भाई-बहन के स्नेह को अभिव्यक्त किया, जबकि शिखा गुप्ता समूह ने “मैं तो छोड़ चली बाबुल का देश” प्रस्तुत कर सभी को भावुक कर दिया।

    नीरू सिलाई केंद्र की किशोरियों ने “कुड़माई के दिन आ गए” से विवाहोत्सव की उमंग दिखाई। सेवा भारती समूह ने “लड़की तुम्हारी कुंवारी रह जाती” के माध्यम से सामाजिक संदेश के साथ हास्य-व्यंग्य का संतुलन प्रस्तुत किया।

    रजनी मित्तल एवं अर्चना गुप्ता ने “मेरी बन्नो की आएगी बारात” से उत्साह बढ़ाया, वहीं शिक्षिका रमन की “मेहंदी है रचने वाली” प्रस्तुति ने पारंपरिक लोक-संस्कृति को जीवंत किया।

    “शुभ आंगन” की प्रस्तुति कुमकुम गुप्ता एवं उनकी टीम द्वारा आकर्षक रही। कमल आर्य ने काव्यात्मक प्रस्तुति “मिश्री सी मीठी बातें” से सरसता घोली। कार्यक्रम के अंत में रेनू मिश्रा एवं ममता त्यागी ने “सोन चिरैया, अब तुम उड़ने वाली हो” प्रस्तुत कर भावुक समापन किया।

    सम्पूर्ण आयोजन भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों एवं सामाजिक समरसता का सजीव उदाहरण बना। सेवा भारती समिति, अलवर के इस प्रयास ने सामूहिक विवाह जैसे पुण्य कार्य के प्रति समाज में जागरूकता और सहभागिता को नई दिशा दी।

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