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    अहिंसा स्थल जैन मंदिर का रजत जयंती समारोह 30 नवंबर से शुरू

    अहिंसा स्थल जैन मंदिर का रजत जयंती समारोह 30 नवंबर से, दो दिनों तक विविध धार्मिक कार्यक्रम

    मिशनसच न्यूज अलवर, 28 नवम्बर।
    अलवर शहर के जयपुर रोड स्थित ढ़ाई पैड़ी क्षेत्र में बने अहिंसा स्थल दिगम्बर जैन मंदिर में रजत जयंती समारोह की तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं। मंदिर में विराजित भगवान आदिनाथ की प्राण प्रतिष्ठा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इस वर्ष विशेष दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जैन समुदाय में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

    अहिंसा स्थल के प्रबंधक बच्चू सिंह जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि अहिंसा स्थल दिगम्बर जैन मंदिर में भगवान आदिनाथ की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा 1 दिसम्बर 2000 को की गई थी। इसी उपलक्ष्य में मंदिर प्रांगण में इस बार रजत जयंती वर्ष का भव्य आयोजन 30 नवम्बर और 1 दिसम्बर को किया जाएगा। आयोजन समिति के अनुसार इन दो दिनों में कई महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और विशेष कार्यक्रम रखे गए हैं जिनमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

    पहला दिन – 30 नवंबर

    30 नवंबर की सुबह कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह 7 बजे से होगी।
    इस दौरान श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा और नित्यनियम पूजन आयोजित किया जाएगा। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    इसके बाद भक्तामर विधान का आयोजन होगा, जिसके पुण्यार्जक श्री दिगम्बर जैन पूजन संघ अलवर रहेंगे। भक्तामर विधान जैन धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसे विशेष अवसरों पर आयोजित किया जाता है।

    शाम 6 बजे मंदिर परिसर में महाआरती का आयोजन होगा। आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति की अपेक्षा है। मंदिर प्रशासन ने साफ–सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर विशेष तैयारियां की हैं।

    दूसरा दिन – 1 दिसंबर

    रजत जयंती समारोह का दूसरा दिन पूर्ण रूप से विशेष धार्मिक अनुष्ठानों को समर्पित रहेगा।
    सुबह 7 बजे श्रीजी का अभिषेक और नित्य महा पूजन का आयोजन किया जाएगा।

    इसके पश्चात सवेरे 8:30 बजे से 108 कलशों द्वारा भगवान आदिनाथ की प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक किया जाएगा।
    यह कार्यक्रम इस रजत जयंती उत्सव का सबसे मुख्य आकर्षण माना जा रहा है।

    जैन धर्म में महामस्तकाभिषेक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुष्ठान है, जिसे ऐतिहासिक और पूज्य स्थानों पर विशेष अवसरों पर किया जाता है। इसमें 108 पवित्र जलकलशों से भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया जाता है, जो पवित्रता, शांति और कल्याण का प्रतीक माना जाता है।

    श्रद्धालुओं के लिए खास तैयारी

    मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार दोनों दिनों में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना को देखते हुए पार्किंग, दर्शन व्यवस्था और प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की गई है।

    साथ ही कार्यक्रम स्थल पर स्वास्थ्य सहायता, पानी, प्रसाद और बैठने की उचित व्यवस्था भी की गई है।
    मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया है, ताकि रजत जयंती समारोह को विशेष और यादगार बनाया जा सके।

    समिति का कहना है कि यह अवसर सिर्फ धार्मिक महत्व का नहीं, बल्कि जैन समाज के लिए सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामुदायिक एकजुटता का भी प्रतीक है।


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