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    सार्वजनिक जगहों से हटाए जाएंगे कुत्ते? सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बढ़ाई चर्चा

    नई दिल्ली: देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार सामने आ रही डॉग बाइट (आवारा कुत्तों के काटने) की घटनाओं ने आम नागरिकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों के आतंक और उनकी मौजूदगी को लेकर लंबे समय से कानूनी और सामाजिक बहस चल रही थी। इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के पुराने फैसले में किसी भी तरह का बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि देश की मौजूदा जमीनी हकीकतों और जनता की परेशानियों से आँखें नहीं मूंदी जा सकतीं। शीर्ष अदालत ने सार्वजनिक सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए स्पष्ट किया कि आम नागरिकों को एक सुरक्षित और भयमुक्त माहौल देना पूरी तरह सरकारों की जिम्मेदारी है।

    जमीनी हकीकतों को नजरअंदाज नहीं कर सकती अदालत

    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए साफ किया कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे आवारा कुत्तों के कारण पैदा हो रहे खतरों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि वह जमीनी सच्चाइयों से मुंह मोड़कर कोई ऐसा फैसला नहीं ले सकती जिससे जनता की सुरक्षा खतरे में पड़े। पिछले साल नवंबर 2025 में इस संबंध में जो दिशा-निर्देश और आदेश जारी किए गए थे, वे पूरी तरह प्रभावी रहेंगे और उनमें ढील देने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट के इस रुख से यह साफ हो गया है कि आवारा कुत्तों के नियंत्रण को लेकर प्रशासन को अब और अधिक मुस्तैदी दिखानी होगी।

    आम जनता की सुरक्षा सर्वोपरि और सरकारों की जवाबदेही तय

    सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी सभ्य समाज में नागरिकों की जान-माल और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। अदालत ने सरकारों और स्थानीय प्रशासनों को उनकी बुनियादी जिम्मेदारियों की याद दिलाते हुए कहा कि यह शासन तंत्र का कर्तव्य है कि वह लोगों को ऐसा वातावरण प्रदान करे जहां वे बिना किसी खौफ के आ-जा सकें। विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की सुरक्षा के मद्देनजर अस्पतालों और स्कूलों जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाना अनिवार्य है। कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद अब राज्य सरकारों और नगर निगमों पर आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।

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