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    ईसरदा-बांध बारेठा परियोजना: खुली नहर के विरोध में किसानों का अल्टीमेटम

    भूमिगत पाइपलाइन की मांग पर 4 अक्टूबर को सारसोप में महापंचायत, रामपाल जाट ने वार्ता की मांग उठाई

    जयपुर। ईसरदा से बांध बारेठा तक पानी पहुंचाने के लिए प्रस्तावित खुली नहर के विरोध में किसान महापंचायत ने आंदोलन की चेतावनी दी है। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने सरकार से खुली नहर के स्थान पर भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की मांग की है। उन्होंने प्रभावित किसानों के साथ सार्थक संवाद शुरू करने और इस संबंध में निर्णय लेने का आग्रह किया है।

    रामपाल जाट की ओर से दिए गए ज्ञापन में दावा किया गया है कि प्रस्तावित खुली नहर की लंबाई 189 किलोमीटर और चौड़ाई 150 मीटर है। इसके कारण टोंक, सवाई माधोपुर, करौली, दौसा और भरतपुर जिलों की 13 तहसीलों के 100 गांव प्रभावित हो सकते हैं। ज्ञापन के अनुसार, परियोजना के लिए 11,404 बीघा कृषि भूमि अधिग्रहित किए जाने की आशंका है।

    कृषि भूमि और परिवारों के विस्थापन पर जताई चिंता

    ज्ञापन में कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण से हजारों किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। किसानों को कृषि भूमि के साथ आवासीय मकान, बाड़ा, नोहरा, कुएं और नलकूप जैसी संपत्तियों से भी वंचित होना पड़ सकता है।

    रामपाल जाट ने आशंका जताई कि भूमि अधिग्रहण के कारण प्रभावित परिवारों को अपने गांव और जीवनभर की मेहनत से बनाई गई संपत्तियां छोड़नी पड़ सकती हैं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और सामुदायिक सुविधाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का भी उल्लेख किया।

    गांवों के दो हिस्सों में बंटने की आशंका

    ज्ञापन में प्रस्तावित नहर के कारण कई गांवों के दो हिस्सों में बंटने की आशंका जताई गई है। इसके चलते ग्रामीणों के आपसी मेल-जोल, खेतों तक पहुंच और पशुओं के लिए चारा लाने में परेशानी होने की बात कही गई है।

    किसान महापंचायत का कहना है कि नहर के कारण गांवों की आपसी कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। इससे आवागमन में अधिक समय और धन खर्च होने की आशंका है।

    भूमिगत पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की मांग

    रामपाल जाट ने ज्ञापन में भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 का हवाला देते हुए न्यूनतम भूमि अधिग्रहण के सिद्धांत पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि किसानों की ओर से भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने का सुझाव दिए जाने के बावजूद उस पर पर्याप्त विचार नहीं किया जा रहा है।

    ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित नहर के मार्ग में आने वाले गांवों को पानी का लाभ नहीं मिलने की स्थिति में प्रभावित ग्रामीणों की चिंताएं और बढ़ेंगी। रामपाल जाट ने परियोजना से जुड़ी निविदा और कार्यादेश की प्रक्रिया के बाद भूमि अधिग्रहण शुरू किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। ये सभी बिंदु किसान महापंचायत की ओर से ज्ञापन में रखे गए हैं।

    किसान सभाओं में विरोध का संकल्प

    ज्ञापन के अनुसार, सवाई माधोपुर जिले की बौली तहसील के कोडियाई और बरनाला तहसील के सुंदरी गांव में आयोजित सभाओं में प्रभावित किसानों ने खुली नहर के लिए जमीन नहीं देने का संकल्प जताया। इसमें कहा गया है कि बौली और बामनवास उपखंडों के अधिकारियों के माध्यम से भी ज्ञापन भेजे जा चुके हैं।

    रामपाल जाट ने सरकार के सामने किसानों के साथ आमने-सामने बैठकर चर्चा करने का विकल्प भी रखा है। उनका कहना है कि किसानों की आपत्तियों और सुझावों पर संवाद के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए।

    4 अक्टूबर को सारसोप में किसान महापंचायत

    किसान महापंचायत ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने किसानों के हित में ठोस निर्णय नहीं लिया, तो 4 अक्टूबर 2026 को चौथ का बरवाड़ा तहसील के सारसोप गांव में विशाल किसान महापंचायत आयोजित कर आंदोलन शुरू करने की घोषणा की जा सकती है।

    ज्ञापन में कहा गया है कि 27 सितंबर को आयोजित किसान महापंचायत में भी आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। रामपाल जाट ने सरकार से मांग की है कि खुली नहर के स्थान पर भूमिगत पाइपलाइन से पानी पहुंचाने का निर्णय लिया जाए और प्रभावित किसानों के साथ वार्ता शुरू की जाए।

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